बिहार विधानसभा चुनाव 27 नवंबर तक कराना संवैधानिक अनिवार्यता, चुनाव टाला नहीं जा सकता: एस वाई कुरैशी

नयीदिल्ली,26जुलाई(भाषा)कोरोनावायरसमहामारीऔरबाढ़केकारणनिर्वाचनआयोगद्वाराकुछराज्योंमेंएकलोकसभाएवंसातविधानसभासीटोंकेलिएउपचुनावस्थगितकियेजानेकेबादआगामीबिहारविधानसभाचुनावकेसमयकोलेकरचर्चाशुरूहोगयीहै।इसीविषयपरपूर्वमुख्यचुनावआयुक्तएसवाईकुरैशीसे‘पीटीआई-भाषा’केपांचसवाल:सवाल:कोरोनावायरससंकटमेंकुछराज्योंमेंउपचुनावस्थगितकिएगएहैंतोक्याआगामीविधानसभाचुनावखासकरबिहारचुनावटलसकताहै?जवाब:उपचुनावऔरआमचुनावमेंफर्कहोताहै।विधानसभाचुनावऔरलोकसभाचुनावनिश्चितसमयसीमामेंकरानाअनिवार्यहैक्योंकियहसंवैधानिकजरूरतहै।बिहारमें27नवंबरतकचुनावहोनाहै।इक्का-दुक्कासीटेंखालीरहतीहैंतोवहांचुनावटालनेसेकोईसंवैधानिकसंकटनहींआता।ऐसेमेंबिहारचुनावनहींटालाजासकता।सवाल:बिहारमेंज्यादातरविपक्षीदलचुनावस्थगितकरानेकेपक्षमेंहैं,इसपरआपकीक्यारायहै?जवाब:मुझेहैरानीहैकिविपक्षकहरहाहैकिचुनावस्थगितकरो।विपक्षकाबयानतोइसकेउलटहोनाचाहिए।विपक्षकाप्रयासयहहोताहैकिजल्दचुनावहोंऔरवहजीतकरसत्तामेंआए।यहबातसचहैकिकोरोनावायरसकेकारणहालातगंभीरहैं।लेकिनमुझेनहींलगताहैकिचुनावकोस्थगितकरनापड़ेगा।27नवंबरतकचुनावकरानासंवैधानिकरूपसेअनिवार्यहै।सवाल:क्याबिहारचुनावकोकुछमहीनेकेलिएटालनेकेसंदर्भमेंनिर्वाचनआयोगकेसामनेकोईसंवैधानिकविकल्पहै?जवाब:संविधानकेतहतचुनावकोसमयसीमाकेबादटालनेकासिर्फएककारणहोसकताहैजोआपातकालहै।यहआपातकालदोवजहोंसेहोसकताहै।एकवजहविदेशीआक्रामणहैऔरदूसरीवजहघरेलूबगावतकीस्थिति।फिलहालऐसेहालाततोहैंनहीं।कोविड-19कासंकटआपातकालकीइसपरिभाषामेंनहींआताहै।वैसे,कोविड-19सिर्फहिंदुस्तानमेंतोनहींहै।यहदुनियाभरमेंहै।पिछलेचारमहीनोंमें33देशोंमेंचुनावहुएहैं।सबजगहसेफीडबैकहैकिचुनावअच्छीतरहहुए,कोईदिक्कतनहींआई।पोलैंडऔरदक्षिणकोरियामेंतोमतप्रतिशतबहुतज्यादारहा।अगरपोलैंडऔरदक्षिणकोरियाचुनावकरासकतेहैंतोभारतक्योंनहींकरासकता?चुनावकरानेकेमामलेमेंभारततोविश्वगुरूहै।सवाल:कोरोनावायरससंकटमेंमतदानकरानाऔरडिजिटलचुनावपरसंपूर्णनिर्भरताकितनाव्यावहारिकहोगा?जवाब:देखिए,सामाजिकदूरीकेनियमकापालनकरनासबकीजिम्मेदारीहै।बाजारजाएंतोउसकेलिएनियमहैं,मंदिर-मस्जिदजाएंतोउसकेलिएनियमहैं।चुनावतोएकदिनकीगतिविधिहै,बाजारतोरोजखुलेहुएहैं।बाजारकीभीड़कोसंभालनाज्यादामुश्किलहै,लेकिनचुनावकरानाइससेज्यादामुश्किलनहींहै।चुनावआयोगकहचुकाहैकिहमबूथकीसंख्याबढ़ादेंगेताकिभीड़नहींहो।आज-कलतोस्कूलबंदहैंऔरदूसरेकईविभागभीनहींखुलरहे।इसलिएचुनावकेलिएज्यादासंख्यामेंकर्मचारियोंकीजरूरतकोपूराकरनेमेंभीसमस्यानहींहोगी।ऑनलाइनचुनावप्रचारतोपिछले10सालसेचलरहाहै।2014काचुनावतोवस्तुत:डिजिटलतरीकेसेहीलड़ागयाथा।यहबातभीसहीहैकिऑनलाइनप्रचारजमीनीस्तरपरचुनावप्रचारकीजगहपूरीतरहनहींलेसकता।ऐसेमेंदोनोंकामिश्रणहोनाचाहिए।सामाजिकदूरीकापालनकरतेहुएसीमितसंख्यामेंवाहनोंकेजुलूसऔर‘डोरटूडोर’प्रचारकीअनुमतिदीजासकतीहै।सवाल:कोरोनावायरससंकटकेसमय65सालसेज्यादाउम्रकेलोगोंकेलिएडाकपत्रसेमतदानकीसुविधाकेआयोगकेफैसलेऔरफिरउसेलागूनहींकरनेकेनिर्णयकोआपकैसेदेखतेहैं?जवाब:तकनीकीरूपसेचुनावआयोगकाफैसलासहीथा।सरकारकीतरफसेभीपरामर्शहैकि65सालसेऊपरकेलोगबाहरनहींनिकलें।चुनावआयोगदेशकाकानूनोंकाक्रियान्वयनकराताहै।उससंदर्भमेंडाकमतपत्रवालेआदेशमेंकोईखराबीनहींथी।लेकिनराजनीतिकदलोंनेकुछदिक्कतेंबताईं।बादमेंआयोगकोलगाकि65सालसेज्यादाउम्रकेलाखोंमतदाताहैंऔरइतनेज्यादाडाकमतपत्रकाप्रबंधननहींहोसकेगा।