बाप लगाता है ठेला, बेटा दे रहा संस्कृत ज्ञान

सीतापुर:यहएकऐसेयुवाकीकहानीहै,जिसकामिशनभारतीयसंस्कृतिकोसमृद्धबनानाहै।वहअंग्रेजीजानताहैमगर,उसेअपनीवैदिकभाषासंस्कृतकेमान-सम्मानकीभीउतनीही¨चताहै।यहीनहीं,जिसउम्रमेंयुवाअपनेकॅरियरकेसुनहरेसपनेदेखतेहैं,उसमें22वर्षीयअंशूगुप्तानि:स्वार्थभावसेलोगोंकोसंस्कृतसिखारहेहैं।वहसंस्कृतभारतीकीओरसेकईराज्योंमेंकरीब600लोगोंकोप्रशिक्षणदेचुकेहैं।यहीवजहहैकिआजसीतापुरहीनहीं,दूसरेप्रदेशोंमेंभीअंशूकीपहचानसंस्कृतसेहीहोतीहै।सिखानेकानिरालाअंदाज:

संस्कृतसिखानेकाउनकानिरालाअंदाजलोगोंकोखुद-ब-खुदसंस्कृतकीओरखींचलेताहै।कभीवहगांवोंमेंशिविरलगातेहैं।कभीमंडीसजाकरसब्जियोंकेसंस्कृतनामसिखातेहैं।यहीनहीं,कभीअभिनयतोकभीमोबाइलकासहारालेकरभीसंस्कृतसिखातेहैं।छोड़दीथीइंग्लिशमीडियमपढ़ाई:

शहरकीआवासविकासकॉलोनीकेनिवासीअंशूकेपिताअजयकुमारगुप्तशहीदपार्ककेपासकपड़ोंकाठेलालगातेहैं।उनकेतीनबेटोंमेंअंशूसबसेबड़ेहैं।संस्कृतसेलगावकेकारणआठवींकेबादअंशूनेइंग्लिशमीडियमस्कूलछोड़दिया।प्रशिक्षणकेलिएनहींथीफीस:

शिक्षिकासरिता¨सहचौहानसंस्कृतभारतीसंस्थासेजुड़ीहैं।वर्ष2011मेंउन्होंनेहीअंशूकोतीनमहीनेकेसंस्कृतशिविरमेंबुलायाथा।उसवक्तअंशूकेपासफीसके30रुपयेनहींथे।उसनेदाखिलालेनेसेइंकारकरदियाथा।शिक्षिकाकोपताचलातोउन्होंनेखुदफीसजमाकी।प्रशिक्षणदिलवाया।अंशूकोप्रथमस्थानमिला।मांकेलिएबनेंगेशिक्षक:

अंशूकीमांउसेशिक्षकबननाचाहतीथीं।शादीकेबादउनकायहसपनासाकारनहींहोसका।अबअंशूअपनीमांकेलिएपहलेशिक्षकबननाचाहतेहैं।इसकेबादकुछपैसाकमाकरसिविलसर्विसेजकीतैयारीकरेंगे।'संस्कृतहमारीवैदिकभाषा

है।अगरदेशमेंरहकरहीहमेंअपनीसंस्कृतभाषाकाज्ञाननहींतोयहसंदेशअच्छानहीं।इसेआसानीसेसीखाजासकताहै।मैंचाहताहूंकिसंस्कृतक्रांतिआएऔरदेशकेहरनागरिककोसंस्कृतकाज्ञानहो।'