बाणासुर का किला, मायावती आश्रम और रीठासाहिब, घुमंतुओं के दिल में बसता है चंपावत

नईदिल्‍ली[विनयकुमारशर्मा]।मानसूनयानीबारिशकेदिनोंमेंपहाड़ोंकीओररुखकरनाअमूमनथोड़ाजोखिमभरामानाजाताहै,परआपइसमौसममेंलोहाघाटकारुखकरसकतेहैं।बारिशकेमौसममेंयहस्थानअन्यपहाड़ीस्थलोंकीतुलनामेंसुरक्षितमानाजाताहै।हालांकिविशेषज्ञोंकीमानेंतोअभीइसस्थानकेप्रचार-प्रसारकीजरूरतहै,ताकियहांअधिकपर्यटकआएं।पहाड़ोंकेअनछुएइलाकोंकीसैरकीबातहीकुछऔरहै।यहांहिमालयकोकरीबसेदेखनेकेसाथइतिहासकेपन्नोंकोजीवंतरूपमेंमहसूसकरसकतेहैं।पहाड़ोंकीसंस्कृतिकाअनूठारंगदेखनाहो,तोलोहाघाटकररहाहैआपकाइंतजार।

चंपावतजिलेमेंबसाहैयहखूबसूरतकस्‍बा

उत्तराखंडकेकुमाऊंअंचलमेंसमुद्रतलसेतकरीबन5500फीटकीऊंचाईपरचम्पावतजिलेमेंस्थितहैलोहाघाटकस्बा।इसमौसममेंयदिपहाड़घूमनेकाख्यालआताहैतोकुदरतकीयहखूबसूरतकृतिआपकोलुभालेगी।राफ्टिंगऔरअन्यसाहसीखेलोंकेशौकीनोंकोभीखूबभाएगालोहाघाट।यहांआसपासभीबिखराहुआहैसांस्कृतिकवैभवकाखजाना।

एबटमाउंटपरपहलीकिरणकेसाथदेखेंदमकतीचोटियां

लोहाघाटसेकरीबसातहजारफीटकीऊंचाईऔर13किलोमीटरकीदूरीपरहैएबटमाउंट।ब्रिटिशशासनकेदौरानअंग्रेजअधिकारीजॉनहेराल्डएबटनेइसपर्वतकीखोजकीथी,इसलिएउन्हींकेनामपरइसकानामएबटमाउंटपड़ा।यहांसेहिमालयकीनंदादेवी,त्रिशूलऔरनंदाघुतीजैसीचोटियोंकाविहंगमनजारादिखाईदेताहै।अधिकऊंचाईपरहोनेकीवजहसेएबटमाउंटकातापमानकाफीकमरहताहै।वर्ष1930मेंएबटनेयहांचर्चभीबनवायाथा।

लोहावतीनदीकेतटपरस्थितभगवानशिवकायहमंदिरकभीकैलासमानसरोवरयात्राकापड़ावथा।ऋषेश्वरमहादेवमंदिरलोहाघाटकेलोगोंकीआस्थाकाबड़ाकेंद्रहै।इसमंदिरकेपीछेबड़ीदिलचस्पकहानीहै।पूर्वमेंकालीगांवसेदेवडांगरशिवालयआतेथे।कहाजाताहैकिएकअंग्रेजनेमीनाबाजारमेंदेवडांगरोंकेरास्तेमेंलोहेकागेटबनवाकरतालालगादिया।देवडांगरोंनेजबअक्षतवफूलछिड़केतोतालाखुलगया।देवताओंकीशक्तिदेखकरअंग्रेजनेमंदिरमेंचांदीकाछत्रचढ़ाया।ऋषेश्वरमहादेवकेदर्शनकेबिनालौटनेपरलोहाघाटकीयात्राअधूरीमानीजातीहै।

इसमंदिरकाउल्लेखस्कंदपुराणमेंभीमिलताहै।यहभीशिवकाधामहै।इसकानिर्माणचंदवंशीयराजानिर्भयचंदनेआठवींशताब्दीमेंकरायाथा।यहमंदिरलोहाघाटसेतकरीबन6किमी.दूरस्थितहै।मान्यताहैकिजबपांडवपुत्रअपनीमाताकेसाथअज्ञातवासकेदौरानइसजगहपरभ्रमणकररहेथेतोउसीदौरानआमलकीएकादशीकेदिनराजापांडूकेश्राद्धकीतिथिथीऔरकुंतीनेप्रणकियाथाकिवहश्राद्धमानसरोवरकेजलसेहीकरेंगी।कुंतीनेयहबातयुधिष्ठिरकोबताई।उन्होंनेअर्जुनसेमाताकेप्रणकोपूराकरनेकोकहा।अर्जुननेगांडीवधनुषसेबाणमारकरउसीस्थानपरमानसरोवरकीजलधारापैदाकी।इसेआजभीयहांदेखाजासकताहै।

बाणासुरकाकिला

लोहाघाटसेकरीब7किमी.कीदूरीपरविशुंगक्षेत्रमेंहैबाणासुरकाकिला।पर्वतीयशैलीमेंनिर्मितइसकिलेमेंपत्थरोंकाउपयोगकियागयाहै।इसकीबनावटप्राकृतिकमीनारकीतरहहै।बाणासुरकेकिलेसेलोहाघाटनगरकाशानदारनजारादिखताहै।मानाजाताहैकिइसस्थानपरकिलेकानिर्माणचंदराजाओंनेअपनीसीमाकीनिगरानीकेलिएकरायाथा।इससेनेपालवअन्यस्थानोंसेहोनेवालेआक्रमणोंकीपूर्व-सूचनामिलजातीथी।एबटमाउंटकीतरहयहांसेभीआपहिमालयकीचोटियोंकादीदारकरसकतेहैं।

हिंगलादेवीकेदर्शन

बांजकेघनेजंगलऔरपर्वतकेशिखरपरस्थितहिंगलादेवीमंदिरप्राचीनमंदिरोंमेंसेएकमानाजाताहै।लोहाघाटसे12किलोमीटरदूरचंपावतआएंगेतोयहांतकआपआसानीसेपहुंचसकतेहैं।लोकमान्यताहैकिइसस्थानसेमांभगवतीअखिलतारणीचोटीतकझूला(हिंगोल)झूलतीथीं।इसीकारणइसे‘हिंगलादेवी’कहागया।मान्यतायहभीहैकिमाताकेइसमंदिरकेपासएकबड़ीशिलाकेपीछेखजानाछिपाहैऔरइसखजानेकीचाबीमांहिंगलादेवीकेपासहै।यहमंदिरऐसीजगहपरहै,जहांसेप्राकृतिकसौंदर्यकाप्रत्यक्षदीदारहोताहै।

रीठासाहिबगुरुद्वाराकुमाऊंकासबसेप्रसिद्धगुरुद्वाराहै।यहइलाकामीठेरीठेकेलिएजानाजाताहै।यहांसिखोंकेपहलेगुरुगुरुनानकदेवअपनेप्रियशिष्यबालातथामरदानाकेसाथआएथे।मान्यताहैकिमरदानाकोभूखलगीतोगुरुनानकनेउसेयहांनिवासकररहेगुरुगोरखनाथकेशिष्योंसेभोजनमांगकरखानेकोकहा।मरदानानेउनसेभोजनकाआग्रहकियातोसाधुओंनेउनकीतौहीनकी।गुरुनानकनेशांतभावसेमरदानाकोसामनेखड़ेरीठेकेपेड़सेफलखानेकोकहा।रीठास्वभावसेकड़वाहोताहै,परजैसेहीमरदानानेफलखाएतोवहमीठालगनेलगा।तबसेयहांकेगुरुद्वारेकानामरीठासाहिबपड़गया।रीठासाहिबतकपहुंचनेकेलिएलोहाघाटसेकरीब65किमी.कीदूरीतयकरनीहोतीहै।

ऐतिहासिकस्मारकबालेश्वरधाम

चंपावतनगरमेंस्थितहैऐतिहासिकबालेश्वरधाम।यहांमंदिरोंकेसमूहकोदेखकरआपअचरजमेंपड़जाएंगेकिकैसेसातवींसदीमेंबनायहमंदिरसमूहआजतकइतनीखूबसूरतीसेखड़ाहै।यहइसनगरकागौरवहै।सातवींसदीमेंचंद्रवंशकेपहलेराजासोमचंदनेइसमंदिरसमूहकोबनवायाथा।भारतीयपुरातत्वविभागनेइसेसंरक्षितस्मारकघोषितकररखाहै।

योगसाधनाकामहत्वपूर्णकेंद्र

लोहाघाटसे9किमी.दूरबांजवबुरांशकेघनेजंगलोंकेबीचस्थितहैअद्वैतमायावतीआश्रम।यहयोगसाधनाकाबड़ाकेंद्रहै।इसआश्रमकीस्थापनास्वामीविवेकानंदकेअंग्रेजशिष्यजेएचसेवियरऔरउनकीधर्मपत्नीसीईसेवियरने3मार्च,1899कोकीथी।स्वामीविवेकानंद3जनवरी,1901कोखुदआश्रमआएऔर15दिनतकयहांरुके।इसकेपासहीमाईमातामंदिरहोनेकेकारणआश्रमकानामअद्वैतमायावतीआश्रमरखागया।मायावतीआश्रमस्वामीविवेकानंदद्वाराबेलूरमेंस्थापितश्रीरामकृष्णमठकाहीएकशाखाकेंद्रहै।यहयोगसाधनाकेलिएभीमशहूरहै।यहांआपनकेवलकुदरतकीनिकटताकाबोधकरसकतेहैं,बल्किशहरोंकीकोलाहलसेदूरशांतिऔरसुकूनभीमिलेगा।

प्राकृतिकझीलश्यामलाताल

नैनीतालऔरभीमतालकीतरहयहांभीएकप्राकृतिकझीलहैश्यामलाताल।इसेयहांकेपहाड़कीसबसेखूबसूरतझीलमानाजाताहै।समुद्रतलसेकरीब1500मीटरकीऊंचाईपरस्थितश्यामलातालकेचारोंतरफबांज,चीड़,देवदार,बुरांशसहितकईप्रकारकीवनस्पतियोंनेअपनीआभाबिखेरीहै।यहांभीस्वामीविवेकानंदकीध्यानस्थलीआश्रमहै,जिसकीस्थापनावर्ष1913मेंखुदस्वामीविवेकानंदनेकीथी।इसआश्रममेंस्वास्थ्यकेंद्र,पुस्तकालयभीहै।पूरेवर्षयहझीलअपनेएकसमानरूपमेंरहतीहै।सूखीढांगसेठीकपहलेआपइसझीलकादीदारकरसकतेहैं।

कटकीकालाजवाबस्वाद

लोहाघाटकेबाराकोटमोटरमार्गपरगलचौड़ाकीबंद-कटकीनहींखाईतोसमझिएआपनेकुछनहींखाया।कटकीकास्वादहीऐसाहैकिलोगयहांखिंचेचलेआतेहैं।कटकीगायवभैंसकेशुद्धदूधकोखूबपकाकरबनाईजातीहै।गलचौड़ाक्षेत्रमेंबननेवालीबंदकटकीइसजिलेमेंहीनही,बल्किपूरेकुमाऊंमेंप्रसिद्धहै।एककिलोकटकीकीकीमतअमूमन250रुपयेहोतीहै,जबकिबंद-कटकीमात्रदसरुपयेमेंएकमिलतीहै।

सूखीढांगकाअचार

लोहाघाटसेटनकपुरकीतरफनिकलनेपरआताहैसूखीढांगक्षेत्र।यहइलाकालाजवाबअचारकेलिएप्रसिद्धहै।यहांनींबू,आम,मिर्च,लहसुन,अदरक,बांससमेतकईप्रकारकेअचारबनाएजातेहैं।यहीनहींअचारकेसाथजैम,जेलीकोभीलोगखूबपसंदकरतेहैं।सबसेखासअचारहैबांसका।सूखीढांगहोकरजानेवालाहरव्यक्तिअचारकेरूपमेंचम्पावतजिलेकीशानदारसौगातअपनेसाथलेजानानहींभूलता।

होमस्टेमेंरहनेकाअलगआनंद

वैसेतोलोहाघाट-चम्पावतक्षेत्रमेंदोदर्जनसेअधिकहोटलहैं,परइसक्षेत्रमेंहोमस्टेमेंरहनेकाअपनाहीआनंदहै।यहांचम्पावतमेंएक,लोहाघाटमेंदो,पाटीवबाराकोटमेंएकएकहोमस्टेहैं।पर्यटनविभागकेचारपर्यटकआवासगृहभीहैं।इसमेंचम्पावतवलोहाघाटमेंएक-एक,जबकिदोटनकपुरवभैरवमंदिरमेंहैं।

वाराहीधाम:पाषाणयुद्धकीधरती

वाराहीधामदेवभूमिउत्तराखंडकाअद्भुतअलौकिकधामहै।यहपाषाणयुद्धकेलिएप्रसिद्धहै।यहांहरसालरक्षाबंधनकेदिनपाषाणयुद्धखेलाजाताहै।वाराहकेदर्शनकेलिएआपकोलोहाघाटसेदेवीधुरारोडपर45किलोमीटरकासफरतयकरनाहोगा।मान्यताहैकिजबहिरण्याक्ष्यपृथ्वीकोपाताललोकलेजारहाथातोपृथ्वीकीपुकारसुनभगवानविष्णुनेवाराहरूपधारणकियाऔरपृथ्वीकोअपनेबाएंअंगमेंलेकरउसेडूबनेसेबचाया।देवीधुराकेखोलीखांड़दुबाचौड़मेंवालिक,लमगडिय़ा,चम्यालऔरगहड़वालखामोंयानीदलोंकेलोगदोभागोंमेंबंटकरपाषाणयुद्धखेलतेहैं।

काफीहदतकसुरक्षितहैंयहांकीधरोहर

यहांआदिकालसेजोचीजेंजैसीथीं,आजभीकाफीहदतकवैसीहीहैं।चाहेबाणासुरकिलाहोयाफिरमायावती,देवीधुरावाराहीमंदिर,रीठासाहिबगुस्द्वारा,एबटमाउंट,ऋषेश्वरमहादेवमंदिर,कांतेश्वरआदि।बसप्रचार-प्रसारकीकमीकेचलतेयहांकेपर्यटनमेंकमीआईहै।आएदिननैनीतालक्षेत्रमेंलाखोंकीसंख्यामेंपर्यटकआतेहैंवेअल्मोड़ा,कौसानीकीतरफरुखकरजातेहैंजबकिवेचम्पावतजिलेमेंभीआसकतेहैं।अबऑलवेदरयानीहरमौसमकेलिएसड़ककेनिर्माणकेसाथयात्रियोंकीआवाजाहीबढ़सकतीहै।पर्यटनकोपंखलगसकतेहैं।

-दयाकिशनचतुर्वेदी,पर्यावरणविद,छमनियां,लोहाघाट

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