बाबा को अबीर लगा मिथिलावासी शुरू करते होली

जागरणसंवाददाता,देवघर:देवघरबाबामंदिरसेतीनप्राचीनमेलाकाइतिहासहै।भादोमेला,शिवरात्रिमेलाऔरबसंतपंचमीकामेला।बसंतपंचमीमेलाकीख्यातिमिथिलासेहै।इसअढ़ाईदिनकेमेलामेंकेवलमिथिलावासीहीआतेहैं।इसमेंदरभंगासेलेकरसीतामढ़ीतककाइलाकाहै।तिलककीरस्मनिभानेकेलिएहरएकमिथिलावासीबाबाकोअबीरलगातेहैं,उसकेबादअपनेमाथेपरगुलाललगाकरसंगआएश्रद्धालुओंकोगुलाललगातेहैं।यहांसेजानेकेबादमिथिलामेंहोलीशुरूहोतीहै।माघमेंहीफगुआगीतशुरूकरदेतेहैं।यहपरंपराबाबादरबारसेमिथिलातककीहै।सीमामढ़ीकेदिनेशकुमारझानेकहाकिअबीरलगाकरतिलकोत्सवकरतेहैं।बाबापरघीचढ़ातेहैंऔरबेसनकालड्डूकाभोगलगाकरआरतीकरतेहैं।विपिनतिवारीकहतेहैंकिकांवरमेंदोपात्रलातेहैंएकआतेहीबाबाकोअर्पितकरतेहैं।दूसरापात्रकाजलपंचमीकोअर्पितकरतेहैं।मिथिलाविद्यापतिमंचकेबैनरतलेआनेवालेयहभक्ततीनदशकसेबाबाकेदरबारआरहेहैं।परंपराओंसेजुड़ाहैतिलोकत्सवमिथिलावासियोंकीयहपरंपरात्रेतायुगसेचलीआरहीहै।बाबाबैद्यनाथकेदरबारकीकथानिरालीऔरएतिहासिकहै।मिथिलावासीअपनेकोहिमराजाकीप्रजामानतेहैं।पार्वतीहिमालयकीबेटीहैइसलिएबसंतपंचमीकेदिनलड़कीपक्षकीतरहसाथलाएधानकीबाली,घी,बेसनकालड्डूसेतिलककारस्मकरतेहैं।बाबाभोलेनाथ,बाबाभैरवनाथकीपूजाकरनेकेबादगुलालखेलतेहैंऔरमिथिलाकोलौटजातेहैं।