अपनों के प्यार नरेश को लाया लोहाघाट

संवादसहयोगी,लोहाघाट:माटीकादर्दऔरअपनोंकाप्यारशायदहीकिसीकोयादआताहै।जिनकेमनमेंअपनीमाटीकीखुशबूमहकनेलगतीहैवहफिरकुछभीकरनेकोतैयाररहतेहैं।नतीजतनइसकेपरिणामहमेशाभीसकारात्मकरहतेहैं।

राष्ट्रीयपुरस्कारलिएचयनितशिक्षकनरेशरायउन्हींमेंसेएकहैं,जिन्हेंअपनेगांवकीमाटीसेबेहदलगावथा।एकसमयथाजबउन्हेंदिल्लीसचिवालयमें¨हदीअनुवादककेरूपमेंसरकारीनौकरीमिलीथी।बावजूदइसकेउन्हेंअपनोंकाप्यारवमाटीकादर्दकुछइसकदरसतानेलगाकिवहनौकरीछोड़करवहलोहाघाटनगरसेलगेरायनगरचौड़ीगांवलौटआए।उन्होंनेगांवहीनहींक्षेत्रकेआर्थिकरूपसेकमजोरबच्चोंवक्षेत्रीयलोगोंकीसहायताकरनाशुरूकरदिया।इसकेअलावाविलुप्तहोरहीस्थानीयसंस्कृतिकोबढ़ानेकीपहलभीतेजकरदी।क्षेत्रकेप्रसिद्धशिक्षकवप्रधानाचार्यरहेस्व.भवानीदत्तरायकेपुत्रअंग्रेजीशिक्षकनरेशरायवर्ष1989मेंएमएबीएडकेउपरांतकेंद्रीयसचिवालयमेंराजभाषासेवामें¨हदीअनुवादककेतौरपरतैनातीप्राप्तकी।वर्ष1995मेंउन्होंनेइसपदसेत्यागपत्रदेदिया।नौकरीछोड़नेकेबादलंबेसमयतकविभिन्नपत्र-पत्रिकाओंमेंलेखनकार्यकरसमाजकोएकनईदिशादेनेलगे।बादमेंउन्हेंबाराकोटविकासखंडकेराइंकाबापरूमेंअंग्रेजीशिक्षककेरूपमेंतैनातीमिली।शिक्षकरायपिछलेदोदशकसेलोहाघाटनगरमेंआयोजितहोनेवालीश्रीरामलीलामंचनकाकुशलसंचालनवक्षेत्रकेअन्यस्थानोंमेंहोनेवालेमेले-महोत्सवआदिकेमाध्यमसेलोकसंस्कृतिकेसंरक्षणवसंवर्धनकेलिएकार्यकरतेआरहेहैं।उन्होंनेअपनीइसउपलब्धिकाश्रेयअपनेस्व.पिता,मित्रोंवशिक्षाविभागकेअधिकारियों,कर्मचारियोंवलोकसांस्कृतिककलाकारोंकोदियाहै।

पत्रकारितामेंभीडिग्री

लोहाघाट:शिक्षकनरेशरायलंबेसमयसेलेखनवफिल्मसंपादनसेभीजुडे़हुएहैं।उन्होंनेजलसंसाधनमंत्रालयकीपत्रिकारसाकासंपादन,लघुफिल्मप्लीजकम-इनकासंपादनवनिर्देशन,लघुफिल्मज्योतिमेंअभिनयवसंयोजनकरनेकेअलावासामान्यनिर्वाचनपरआधारितमतदानफिल्मोंकीकहानीभीलिखीहै।पत्रकारितामेंविशेषरुचिरखनेवालेरायनेबीतेवर्षहीपत्रकारितामेंडिग्रीभीहासिलकीहै।