अपनी मेहनत के बदौलत सफल होते हैं बच्चे, सरकारी स्कूलों की हालत दयनीय

अरिरया।कोरानाकालमेंशिक्षाव्यवस्थापरबहुतबुराअसरपड़ाहै।महामारीकेचलतेपिछलेदसमाहसेसरकारीस्कूलोंमेंविधिवतपढ़ाईनहींहुईहै।जिलेकेसरकारीस्कूलोंमेंसंसाधनकीघोरकमीहै।जिलाकीनाककहेजानेवालेएचईप्लसटूविद्यालयमेंविषयवारशिक्षकनहींहै।बावजूदयहांकेबच्चेअपनीमेहनतकेबलपरबेहतररिजल्टदेरहेहैं।

90फीसदीबच्चोंकोमिलीसफलता:

एचईप्लसटूविद्यालयमेंशिक्षकवसंसाधनोंकीघोरकमीकेबावजूदमैट्रिकवइंटरकीपरीक्षामेंयहांकेबच्चेशानदारप्रदर्शनकियाहै।

मैट्रिकपरीक्षा2020में90फीसदीबच्चोंनेसफलताहासिलकी।मैट्रिकपरीक्षामें465में362औरइंटरपरीक्षामें170में154बच्चेसफलहुएथे।

इतनाहीनहींइसीविद्यालयकेअंकितराजनेमैट्रिकपरीक्षामेंस्टेटमेंछठास्थानप्राप्तकरजिलेकानामरोशनकियाथा।इसबारमैट्रिकमें407औरइंटरमें213बच्चेपरीक्षामेंशामिलहोंगे।

इंटरमेंविषयवारनहींहैंशिक्षक:

एचईप्लसटूविद्यालयोंमें11वींमें266बच्चेनामांकितहैं।इसमें170कलाएवं84विज्ञानऔर12कॉमर्सकेछात्रहैं।जबकि12वींकक्षामें213बच्चेनामांकितहैं।इसमेंकलाके152,विज्ञानके48,कॉमर्सके13बच्चेंहैं।इन्हेंपढ़ानेकेलिएकुलआठशिक्षकहैं।जिसमेंतीनअतिथिशिक्षकभीशामिलहैं।इसप्रकारबच्चोंकेअनुपातकेअनुसारशिक्षकोंकीकमीहै।आर्टसविषयमेंतोकेवलएकहीशिक्षकहैं।भूगौल,राजनीतिकशास्त्रपढ़ानेकेलिएएकभीशिक्षककार्यरतनहींहै।

730बच्चोंपर15शिक्षककार्यरत:

एचईप्लसटूविद्यालयमेंनौवींएवंदसवींमेंनामांकितबच्चोंकीसंख्या730है।जिसमेंनौवींमें323औरदसवींमें407बच्चेशामिलहैं।इन्हेंपढ़ानेकेलिएस्कूलमेंकुल15शिक्षककार्यरतहैं।इसकेअलावेएकशारीरिकवलाइब्रेरीशिक्षकहैं।भूगौलवसामाजिकविज्ञानकेशिक्षकपदरिक्तहै।जबकिसंस्कृतकेदोरिक्तपदोंमेंकेवलएकशिक्षककार्यरतहैं।इसकेअलावेअन्यविषयोंकेलिएएकएकशिक्षकहैं।कुछविषयोंकीपढ़ाईभीनहींहोपातीहै।

नहींहोतीकंप्यूटरकीपढ़ाई:

इसआधुनिकयुगमेंइसविद्यालयकेबच्चोंकोकंप्यूटरकीजानकरीनहींहै।इसविद्यालयमेंनतोकंप्यूटरशिक्षकहैऔरनहीकंप्यूटरहीउपलब्धहै।ऐसेमेंनएयुवापीढि़योंकोमुख्यधारामेंजोड़नाबेमानीसाबितहोगी।शिक्षकसुनीलकुमारनेबतायाकिपर्याप्तसंख्यामेंबेंचडेक्सभीनहींहै।यदिसभीबच्चेस्कूलआनेलगेंगेतोबेंचडेक्सकमपड़जाएगा।शिक्षकोंकीकमीकेचलतेभीपरेशानीहोतीहै।सीमितसंशाधनकेबावजूदयहांकेशिक्षककड़ीमेहनतकरबच्चोंकोपढ़ातेहैं।इसस्कूलकारिजल्टभीअच्छाहोताहै।

स्मार्टक्लासेससेभविष्यसंवारनेकीकोशिश:

स्कूलमेंपिछलेदोसालसेस्मार्टक्लासेसकासंचालनहोताहै।परंतुकोरानाकालकेकारणइसपरभीग्रहणलगगयाहै।कोरोनावायरसकेचलतेमहीनोंसेक्लासबंदथा।बादमेंगाइडलाइनकेअनुसारक्लासेसशुरूकियागया।परंतुबच्चोंकीउपस्थिथिबहुतकमरहतीहै।केवल20बच्चोंनेअपनेअभिभावकोंकासहमतिपत्रविद्यालयमेंजमाकियाहै।नाममात्रकेबच्चेस्मार्टक्लासमेंपहुंचतेहैं।जिन्हेंपढ़ाईकरनेकाटिप्सबतायाजाताहै।स्मार्टक्लासेससेबच्चोंकीभविष्यसंवारनेकीकोशिशजारीहै।कोट-कोरोनामहामारीकेकारणनियमितरूपसेकक्षासंचालननहींहोसकाहै।शिक्षकोंकीकमीहै।जिसकेचलतेपरेशानीहोतीहै।जोभीसंसाधनहै,उससेबेहतरशिक्षादेनेकाप्रयासकियाजाताहै।कंप्यूटरऔरकंप्यूटरशिक्षकनहींहै,जिसकारणकंप्यूटरकीपढ़ाईनहींहोपातीहै।निशातहाफिज,एचएमएचईप्लसटूविद्यालयअररिया।कोट-स्कूलकीसमस्याओंकीजानकारीलेकरजोभीकमियांहोगीउसेदूरकरानेकाप्रयासकियाजाएगा।सभीप्लसटूविद्यालयोंमेंनौंवीवदशमींकेबच्चोंकेलिएविभागीयगाइडलाइनकेअनुसारस्मार्टक्लासेसकासंचालनकियाजारहाहै।

प्रवीणकुमार,डीपीओएसएसएअररिया।