अफसर और नेता बदले पर नहीं दे सके एक पक्का रास्ता

संवादसूत्र,किशुनपुर:विजयीपुरब्लाककेपहोरागांवमेंस्कूलतोबनाहै,लेकिनवहांतकपहुंचनेकेलिएपक्कारास्ता40वर्षबीतनेकेबादभीनहींबनपायाहै।खैर,कारणजोभीरहेंहों,परइसदौरमेंकईअफसरऔरनेताबदलचुकेहैं।विकासनिधिभीखर्चहोगई,लेकिनबच्चोंकोएकपक्कारास्तानहींदेपाई।ऐसेमेंपगडंडीकेसहारेदेशकेकर्णधारविद्यालयकीदूरीनापरहेहैं।वहीं,बरसातकेदिनोंमेंइनछात्रोंकोविद्यालयपहुंचनेमेंबहुतदिक्कतेंउठानीपड़तीहैं।

पहोरागांवमेंवर्ष1982मेंपरिषदीयविद्यालयकीइमारतबनीथी।अगलेवर्षसेहीबिल्डिंगमेंकक्षासंचालनशुरूहोगया।विद्यालयतकजानेकेलिएपक्कारास्तानहींबना।खेतकेमेड़वकच्चेरास्तेसेहोकरनौनिहालविद्यालयआते-जातेहैं।मौजूदावर्षमेंकक्षाएकसेपांचवीतकके60छात्रोंकापंजीकरणहै।ग्रामीणोंनेबतायाकिकईबारस्कूलतककेलिएएकपक्कामार्गबनवानेकीमांगकीगई।रास्तासहीनहोनेकीवजहसेबच्चेजोखिमउठाकरस्कूलआते-जातेहैं।रामूसिंह,राकेशकुमार,प्रमोदसिंहआदिग्रामीणोंकाकहनाथाबारिशकेदिनोंमेंसबसेअधिकसमस्याहोतीहै।छोटेबच्चोंकोगोदमेंलेकरस्कूलछोड़नेजानापड़ताहै।कीचड़वफिसलनकीवजहसेबच्चेगिरकरचुटहिलहोजातेहैं।बरसातकेदिनोंमेंजहरीलेकीड़ोंकाजोखिमभीरहताहै।प्रधानाचार्यमनमोहनसिंहकाकहनाथाविद्यालयनिर्माणकेसाथहीपक्कारास्ताबननाचाहिएथा।रास्तासहीनहोनेकीवजहसेशिक्षकोंकोभीसमस्याहोतीहै।पहोरागांवमेंपरिषदीयविद्यालयतकपक्कारास्तानहोनेकीसमस्यासंज्ञानमेंहै।उक्तकेसंबंधमेंउच्चाधिकारियोंकोपत्राचारकियाजाचुकाहै।जैसेहीइससंबंधमेकोईआदेशप्राप्तहोताहै,उसपरअमलकियाजाएगा।

राजीवरंजन,बीईओ-विजयीपुर