..अब आशीर्वाद के लिए उठते हैं बारुद उठाने वाले हाथ

सुलतानपुर:देशसेवाकाजज्बालेकरसितंबर1962मेंवायुसेनामेंभर्तीहुएदूबेपुरविकासखंडकेकटावांनिवासीसमरजीतसिंहपाकिस्तानसेछिड़ी1965व1971कीलड़ाईकेगवाहरहेहैं।फ्लाईटमैकेनिकसमरजीतनेयुद्धकेलिएजानेवालीलड़ाकूजहाजमेंबारूद,राकेट,लांचरभरनेखतरेभरीजिम्मेदारीकोबखूबीनिभाया।1994मेंरिटायरहोनेकेबादउन्होंनेदेशसेवाकेजज्बेकोसमाजसेवा,पर्यावरणसंरक्षणवधार्मिकप्रचार-प्रसारकीतरफमोड़दिया।मिलनेवालीपेंशनसेगरीबकन्याओंकीशादीकराकरउन्हेंआशीर्वाददेकरविदाकरनाअपनेकर्ममेंशामिलकरलिया।खुदकेतैयारकिएगएहरेउपवनसेउपजनेवालेफलवफूलकोबेचनेकीबजायवहउन्हेंआमलोगोंमेंबांटदेतेहैं।

-कलाईकुंडामेंमिलीथीपहलीतैनाती

कानपुरमेंट्रेनिगपूरीकरनेकेबादउनकीतैनाती1965मेंपश्चिमबंगालकेकलाईकुंडामेंफ्लाइटमैकेनिककेरूपमेंहुई।कुछहीदिनोंमेंपाकिस्तानसेयुद्धशुरूहोगया।उन्हेंजंगमेंलगीफाइटरप्लेनमेंबारुद,राकेट,लांचरभरनेकाजिम्मामिलगया।पाकिस्तानसेहुए1971केजंगमेंभीउन्हेंइसीकाममेंलगादियागया।उसदौरानउनकीतैनातीबरेलीएयरबेसपरथी।देशसेवामेंभागीदारीकरनेकेलिएसरकारद्वाराउन्हेंसम्मानितभीकियागया।

-दर्जनोंनिर्धनकन्याओंकीकराईशादियां

सेवानिवृत्तकेबादसमरजीतनेदूसरोंकेलिएजीनेकोहीअपनाआधारबनालिया।गांवकेहीगोमतीनदीकेतटपरजनसहयोगसेजीर्ण-शीर्णपड़ेपौराणिकहनुमानमंदिरकानिर्माणकराया।इसीमंदिरपरखुदकेरुपयेसेदर्जनभरगरीबनिर्धनकन्याओंकीशादीकराचुकेहैं।गांवमेंअशिक्षाभीकाबोलबालाथा।साक्षरबनानेकेलिएउनकेप्रयाससेगांववालोंको2005मेंविद्यालयमिलगया।गरीबबच्चोंकोपाठन-पाठनसामग्रीभीवेउपलब्धकरातेहैं।

-बेजानजमीनपरबिखेरीहरियाली

घरसेदूरकरीबआधाकिमीदूरबेजानजमीनकोउपजाऊबनाकरउनकेहीहाथोंसेतैयारकियागयागुलजारबगीचाहीउनकाआशियानाहै।बागमेंलगेकटहल,लीची,आम,अमरूद,नाशपातीवखूबसूरतफूलोंसेसजीक्यारियोंकीवेखुददेखरेखकरतेहैं।