आश्रम न आकर घर में ही मनाए गुरु पूर्णिमा पर्व

जागरणसंवाददाता,पीडीडीयूनगर(चंदौली):वर्तमानसमयमेंउत्पन्नपरिस्थितिमेंबहुतसीआत्माएंसंसारकोछोड़करचलीगईहैं।यहसंसारकीस्थाईसमस्याहै।वहजल्दहीभुलादिएजाएंगे,भविष्यमेंदूसरीसमस्याओंकेआगमनहोतेहीसपनोंकेइससंसारमेंअक्सरमनुष्योंकेजीवनमेंबुरीआत्माओंद्वाराहीसमस्याएंलाईजातीहैं।

यहबातेंमंगलवारकोपूज्यमांसर्वेश्वरीसेवासंघ,जलीलपुर,पड़ावसेबाबाअनिलरामनेकहीं।उन्होंनेकहाकोविडकेसंक्रमणकोदेखतेहुएघरमेंहीगुरुपूर्णिमामनाएं।उन्होंनेश्रद्धालुओंसेआश्रमनआनेकीअपीलकी।

कहाकिसमस्याएंमनुष्योंकेजीवनमेंविघ्नउत्पन्नकरउसेनिरंतरशांति,स्थिरएवंएकात्मजीवनजीनेसेवंचितरखनाचाहतीहैं।जोकुछभीहुआहैं,वहमनुष्योंद्वाराकिएगएकृत्यहीहैंऔरवहअभीसमाप्तभीनहींहुआहैंवहमारेजीवनमेंनकारात्मकताकासंचारकररहाहै।ऐसीविषमपरिस्थितियोंमेंपरिवारोंकोजोसहायताप्रदानकीजारहीहै,वहइसधरतीपरअत्यधिकदूरदर्शिताएवंसकारात्मकताकासंचारकरेगी।