आधुनिकता के नाम पर रौंदे जा रहे वृक्ष

यहकैसीविडंबनाहैकिजिसदेशमेपेड़ोंकीपूजासदियोंसेहोतीआरहीहैउसीदेशमेसबसेज्यादापेड़काटेजातेहैं।डरावनासचतोयहहैकिपिछलेसौसालोंमेंपेड़ोंकीसंख्या80फीसदकमगईहै।वृक्षोंकीकमहोतीसंख्याकेलिएदोषीखुदहमहैं।इसकार्यमेंसरकारभीकमदोषीनहींहै।आधुनिकताकेनामपरजिसप्रकारसेवृक्षोंकोरौंदाजारहाहैवहमानवजीवनकेअस्तित्वकोहीसमाप्तकरसकताहै।

तकनीकविकसितकरनेकीजरूरत:

यहसचहैकिविकासकोनहींरोकाजासकता।नहीआधुनिकताकेबढ़तेकदमकोही।लेकिनवृक्षोंकोबचानेकीतकनीकअपनायीजासकतीहै।अमेरिकाजैसेविकसितराष्ट्रोंमेंभारतसेकहींज्यादाकल-कारखानेहैं।बावजूदप्रदूषणकेमामलेमेंभारतकास्थानसबसेउंचाहै।कारणहमनेंसिर्फवृक्षोंकीकटाईकोहीआधुनिकतामानालेकिनदूसरेदेशोंमेंऐसीबातनहीं।वहांसौसालपुरानेवृक्षोंकोभीहाइड्रोलिकमशीनसेउखाड़करदूसरेजगहलगायाजाताहै।जबदूसरेदेशोंमेंऐसीतकनीकमौजूदहैतोफिरभारतमेंक्योंनहीं।संकटमेंहैजीवन:

विश्वस्वास्थ्यसंगठनकेअनुसारपूरीदुनियामेसिर्फआठफीसदलोगोंकोस्वच्छहवानसीबहैशेष92फीसदलोगखराबहवामेंजीनेकोमजबूरहैं।भारतमेपर्यावारणकासंकटअन्यदेदेशोंकीतुलनामेंज्यादाहै।पूरीदुनियाकी17फीसदआबादीभारतमेरहतीहैजबकिपूरेविश्वकेभौगोलिकक्षेत्रकासिर्फ2.5फीसदहिस्साजमीनकेरूपमेंहमारेपासहै।प्रतिदिनठोसघरेलूईंधनकेरूपमेंसवादोअरबकिलोलकड़ी,कोयलाऔरअन्यजलावनकाउपयोगहमारेदेशमेहोताहै।बिजलीउत्पादनकेलिएकोयलेसेचलनेवालेतीनसौसेभीज्यादाथर्मलहमारेदेशमेहैंजिसमेंहरसाललगभग87मिलियनटनकोयलाजलायाजाताहै।इन्हीसभीकारणोंसेहमारादेशहालमेंहीडब्लूएचओकेआंकड़ोंकेमुताबिकवायुप्रदूषणकेमामलोंमेंविश्वविजेताबनगयाहै।स्वच्छपर्यावरणकेमामलेमेंभारतफिसड्डी:

दुनियाके15सबसेप्रदूषितशहरोंमें14भारतकेहैंजिसमेंतीनशहरबिहारकेहैं।इतनाहीनहीपिछलेसालस्वच्छपर्यावरणकीसूचीमें180देशोंमेंहमारास्थान177वांहै।भारतमेंलीगईसांसआपकोबीमारियोंऔरमौतकेकरीबलारहीहै।पिछलेसालदिल्लीके44लाखवैसेस्कूलीबच्चोंकाफेफड़ाटेस्टकियागयाथाजिनकीउम्र4से17सालकेबीचथीऔरइनमेंसे23लाखसेज्यादाबच्चोंकेफेफड़ेखराबहालतमेंथे।हमारेदेशमेजिसतेजीसेप्रदूषणबढ़रहाहैआनेवालेबीससालोंमेंपूरादेशबीमारहोगा।आनेवालासमयजलसकंटसेभराहोगा:

2025तकभारतमेघोरजलसंकटहोगा।पिछेलसालभारतमे1800करोड़रुपयेकाबोतलबंदपानीबेचागया।अगले20सालमेंसबसेबड़ाव्यापारपानीकाहीहोगाजबएकआदमीराशनदोसौरुपयेकाऔरपानीचारसौरुपयेकाखरीदेगा।धरतीकातापमानरोजबढ़रहाहै,बारिशगायबहोरहीहै,जीवनदायिनीनदियोंमेंपानीनहीहै,धरतीबंजरहोचुकीहै।मौसमकीमारसेकिसानआत्महत्याकररहेहैं।पिछले50वर्षोंमेंवन्यजीवप्राणियोंऔरसमुद्रीजीवोंकीसंख्याआधीसेभीकमहोगयीहै।सोनाकीजगहआगउगलरहेहैंखेत:

देशकीधरतीसोनाउगलेलेकिनअबआगउगलरहीहै।खेतोंमेंबड़ीबेरहमीसेआगलगायाजारहाहैजिसकेवजहसेजमीनतेजीसेबंजरहोरहीहैऔरमिट्टीकोउर्वरकबनानेवालेकीड़ेमरजातेहैं।पहलेसेहीवायुमंडलमेंमौजूद819अरबटनकार्बनऔरग्रीनहॉउसगैसोंनेपृथ्वीकेतापमानकोकाफीबढ़ादियाहै।

पौधरोपणएकमात्रविकल्प:

बढ़तेतापमानकोरोकने,भूजलकेस्तरकोमेंटेनरखनेतथास्वच्छवायुकेलिएपौधेहीएकमात्रविकल्पहैं।पौधेहीजीवनहै।इसकेलिएजिलेमेंमिशनहरियाली,नूरसरायजैसीसंस्थाजरूरकार्यकररहीहैं।लोगोंकोअपनेपैसेसेमुफ्तपौधेबांटरहीहै।लेकिनअफसोसतोइसबातकीहैकिदूसरीसरकरीवगैरसरकारीसंगठनइसकोलेकरतत्परनहींहैं।