इस सम क रचर्ज कब खत्म हग

लेकिन सवाल ये उठता है कि चुनाव से ठीक पहले बेबीरानी मौर्य को एक जाटव नेता के रूप में पेश करके बीजेपी क्या हासिल करना चाहती है. ये स्पष्ट है कि किसी को भी चुनाव से कुछ महीने पहले मायावती के विकल्प के रूप में खड़ा करना आसान नहीं है.