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खूंटी : घाघरा गांव का दौरा करने के बाद संयुक्त विपक्षी दलों के नेताओं ने उपायुक्त सूरज कुमार और एसपी अश्विनी कुमार सिन्हा के साथ बैठक की। वहां के माहौल से उन्हें अवगत कराते हुए गांव से तत्काल पुलिस को हटाने की बात कही। नेताओं ने कहा कि ग्रामीण पुलिस से डरी हुई है। गांव के ग्रामीण गांव छोड़ भागे हुए हैं। गांव में सिर्फ महिलाएं रह रही हैं। ग्रामीण गांव नहीं लौटेंगे तो उनकी खेती मारी जाएगी। गरीब किसानों को सालभर रोटी की समस्या हो जाएगी। इस घटना में जो दोषी हैं उसे पुलिस गिरफ्तार करें। लेकिन निर्दोष ग्रामीणों को बेवजह तंग नहीं करें। इस बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय, पूर्व राज्यसभा सांसद प्रदीप बलमुचू, प्रदेश झामुमो के वरीय नेता सुप्रियो भट्टाचार्या, पौलूस सुरीन,भाकपा-माले और सीपीआई के नेता मौजूद थे। वहीं बैठक के बाद मीडिया से बात करते प्रदीप बलमुचू ने कहा कि पुलिस से ग्रामीणों का डर है उसी को संवाद करने गांव भेज रहे हैं। ग्रामीणों का डर लगता है कि कही झूठे केस में मुझे फंसा देगा। पुलिस मारपीट करेगी। इसलिए हमने कहा कि पहले पुलिस को वहां से हटाएं। गांव वाले को सरकार और जिला प्रशासन के प्रति विश्वास पैदा करें। इसमें सरकार की मंशा साफ होना चाहिए। इस मामले को सरकार आगे खींचना चाहती है। उन्होंने कहा कि घाघरा गांव में राजनीतिक और समाजिक दोनों पहल होनी चाहिए। सरकार को पत्थलगड़ी समर्थकों से बातचीत करना चाहिए। वहीं आधारकार्ड और वोटरकार्ड को जलाने की बात पर कहा कि आधार कार्ड और वोटरकार्ड की उपयोगिता को वह नहीं समझ पा रहा है। इसके लिए सरकार को उनलोगों को समझाने की जरूरत है।