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निजी स्कूलों की फीस लेने पर लगाई अस्थायी रोक लगाने का मुद्दा गर्माता जा रहा है। सरकार ने निर्देशों को मानते हुए सभी प्राईवेट स्कूलों ने फीसें नहीं ली। यहां तक कि उस नोटिस की निर्धारित सीमा खत्म होने उपरांत भी अभिभावक से फीसें नहीं मांगी। पंजाब की एसोसिएशनों की सांझी फेडरेशन आफ एसोसिएसन ऑफ प्राईवेट स्कूल आफ पंजाब के प्रधान जगजीत सिंह धूरी ने बताया कि फेडरेशन के प्रतिनिधि की कई बार शिक्षा मंत्री से मुलाकात हो चुकी है। शिक्षा मंत्री ने भरोसा दिया कि वह लोकहितों ने साथ-साथ स्कूल हितों को भी ध्यान में रखेंगे, परंतु इस फैसले में देरी होने के कारण प्राईवेट स्कूलों के सभी मुलाजिमों में निराशा है। पंजाब सरकार का इस संबंधी फैसला सभी देश के राज्यों की अपेक्षा लेट है। जगजीत सिंह धूरी ने बताया कि उन्हें उम्मीद है कि सरकार एक-दो दिनों में इस संबंधी फैसला ले लेगी, जिससे प्राइवेट स्कूलों को कुछ राहत की उम्मीद है। फेडरेशन ने फीसों का मुद्दा, रिजर्व फंड का मुद्दा, सरकारी व प्राइवेट स्कूलों में पक्षपाती रवैये का मुद्दा हाईकोर्ट में ले जाने की मुकम्मल तैयारी कर ली है। फेडरेशन को सरकार से है कि सरकार कोई योग्य फैसला लें। फेडरेशन के नुमाइंदे मनजिदर सिंह, विनोद खुराना, हरपाल सिंह यूके, अनिल चोपड़ा, भूपिदर सिंह व सुखजिदर सिंह ने कहा कि सरकार ने माता-पिता को फीस भरने से रोक कर उसी पैसे से शराब खरीदने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने दोष लगाया कि पंजाब के विभिन्न जिलों से सरकारी अध्यापकों ने सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ा दीं व प्राइवेट स्कूलों का डाटा लेकर उनके अभिभाकों को गुमराह किया जा रहा है।