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नयी दिल्ली, 17 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को नौसेना में महिला अधिकारियों के लिए स्थायी कमीशन प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करते हुए आईएनएस ज्योति युद्धपोत पर सेवारत महिला नौसेना अधिकारियों की उपलब्धियों का जिक्र किया। न्यायालय ने कमांडर रूबी सिंह का उदाहरण दिया, जो 1993 में गणतंत्र दिवस के अवसर पर राजपथ पर नौसेना की टुकड़ी में एक पलटन का नेतृत्व करने वाली भारतीय महिला बनीं। न्यायालय ने आईएनएसवी तारिणी का भी उल्लेख किया, जिसने समुद्री मार्ग से विश्व का चक्कर लगाया था। इस टीम की सभी सदस्य महिलाएं थी। न्यायालय ने केंद्र को नौसेना में महिला अधिकारियों को तीन महीने के अंदर स्थायी कमीशन देने के लिए विचार करने को कहा। साथ ही, यह भी कहा कि यह 1963 के ‘नेवल सेरेमोनियल रेगुलेशन’ के आधार पर होना चाहिए। न्यायालय ने कहा कि नौसेना की शार्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) अधिकारी, जो स्थायी कमीशन के लिए उपयुक्त पाई जाएंगी, वे वेतन बकाये के भुगतान, पदोन्नति और सेवानिवृत्ति लाभों को हासिल करने के लिए योग्य होंगी। कई महिला अधिकारियों की ओर से पेश हुई वरिष्ठ अधिवक्ता ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि करीब 100 महिला अधिकारी (सेवारत एवं सेवानिवृत्त) इस फैसले से लाभान्वित होंगी। शीर्ष न्यायालय ने नौसेना में पुरुष और महिला अधिकारियों के साथ समान व्यवहार किए जाने पर जोर देते हुए महिला अधिकारियों के लिए स्थायी कमीशन को मंजूरी दे दी। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी की पीठ ने कहा कि काम पर कार्य निष्पादन और राष्ट्र की खातिर समर्पण मौजूदा लैंगिक रूढ़ीवाद को उपयुक्त जवाब है। न्यायालय ने कहा, ‘‘भारतीय नौसेना में सेवारत महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन पर पुरुषों के समान काम करने से वंचित करना भेदभावपूर्ण है।’’ पीठ ने केंद्र की इस दलील को अस्वीकार कर दिया कि नौसेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) की महिला अधिकारियों को समुद्र में जाने की ड्यूटी नहीं दी जा सकती है क्योंकि रूस में निर्मित जहाजों में उनके लिये अलग से वाशरूम नहीं है। न्यायालय ने कहा...जबकि महिला अधिकारियों ने राष्ट्र के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया है। पीठ ने कहा कि इस तरह की दलीलें केंद्र की 1991 और 1998 की नीति के विपरीत है। इन्हीं नीति के तहत केंद्र ने नौसेना में महिला अधिकारियों को शामिल करने पर लगी कानूनी पाबंदी हटा ली थी। न्यायालय ने नौसेना के लिए पहली पायलट बनीं सब-लेफ्टिनेंट शिवांगी, आईएनएस ज्योति पर सेवा देने वाली लेफ्टिनेंट संध्या सूरी, सर्वश्रेष्ठ इंस्ट्रक्टक्टर पुरस्कार हासिल करने वाली (आईएनएस शिवाजी) कमांडर सुहास पाटनकर के उदाहरणों का जिक्र किया। आईएनएस सुजाता (2002) पर सेवा देने वाली कमांडर रीना मागदालेने, कमांडर अनुराधा कांची और कमांडर बबिता रावत और अन्य महिला अधिकारियों का भी जिक्र किया। पीठ कहा कि सशस्त्र बलों में लैंगिक समानता नहीं देने के 101 बहाने नहीं हो सकते और समान अवसर मुहैया करने की जरूरत है।