उदत उदयगर मंच पर रघुवर बल पतंग

जितना दाव लगे उतनी कीमत वन विभाग के सूत्रों के अनुसार गोह को लेकर भारी अंधविश्वास फैला हुआ है। इसके जननांग को तंत्र-मंत्र और मर्दानगी की दवाइयां बनाने के नाम पर बेचा जाता है। ऐसा विश्वास किया जाता है कि वन्यजीव के अंगों को चांदी के बर्तन में घर में रखने पर लक्ष्मी की कृपा होती है। वैसे इसमें कोई सच्चाई नहीं है, बताया जाता है कि गोह के जननांग की आकृति हूबहू हत्थाजोड़ी नाम के एक पेड़ की जड़ जैसी होती है। इसलिए हत्थाजोड़ी कहते हैं। इनकी कीमत को लेकर कोई मानक तय नहीं है। तस्कर का जितना दाव लगे उतनी कीमत मिल जाती है। यह हजारों से लेकर लाखों तक हो सकती है।