पंचयत में सरपंच

नई दिल्ली।। जेडीयू और बीजेपी में चल रहे वाकयुद्ध में मंगलवार को जेडीयू की ओर से किए गए जवाबी हमले के बावजूद बीजेपी ने चुप्पी साध ली है। पार्टी इस विवाद को अब और ज्यादा लंबा खींचने के मूड में नहीं है। पार्टी को लग रहा है कि इससे एक तो जनता में गलत संदेश जा रहा है और दूसरे इस आपसी विवाद का फायदा यूपीए सरकार को मिल रहा है। दोनों ही विपक्षी दलों को जितनी ताकत यूपीए सरकार पर हमला करने के लिए लगानी चाहिए, वह ताकत एक-दूसरे पर चल रहे हमलों में लग रही है। बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, पार्टी में भी फिलहाल यही हिदायत दी गई है कि इस मामले में कोशिश की जाए कि बोला ही न जाए और अगर बोलने की नौबत भी आए तो बेहद सधी भाषा में बोला जाए ताकि यह विवाद और आगे न बढ़े। नीतीश का पलटवार बरमती ट्रेन में आग लगने के लिए परोक्ष रूप से नीतीश कुमार को जिम्मेदार ठहराने वाले बीजेपी प्रवक्ता के बयान का नीतीश कुमार ने पलटवार करते हुए कहा कि रेलमंत्री का काम सुरक्षा से जुड़ा नहीं है। यह दायित्व राज्य सरकार का होता है। यही नहीं, पार्टी के प्रवक्ता शिवानंद तिवारी ने भी बीजेपी पर हमला करने के साथ ही उसे नसीहत भी दी कि वह अपने सहयोगी दलों का सम्मान करे। इसके अलावा तीखी भाषा में उन्होंने यहां तक कह दिया कि जेडीयू ने बीजेपी को बांधकर नहीं रखा है। तीखी बयानबाजी के बावजूद बीजेपी की ओर से मंगलवार को कोई जवाब नहीं दिया गया। पार्टी सूत्रों के मुताबिक पार्टी नेताओं से कहा गया है कि फिलहाल अब इस मामले को ठंडा करने की कोशिश की जाए ताकि यह विवाद और न भड़के। सूत्रों का कहना है कि पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने सोमवार को ही इस बारे में पार्टी नेताओं को इशारों ही इशारों में इस मामले में चुप रहने के लिए कह दिया था। पार्टी नेताओं का मानना है कि इस टकराव का जेडीयू को कम और बीजेपी को ज्यादा नुकसान हो रहा है। ऐसे में फिलहाल इस विवाद को टालने की कोशिश की जाए। मुद्दा तो अभी जस का तस पार्टी सूत्रों का कहना है कि जिस मामले को लेकर टकराव शुरू हुआ है, उस पर अभी कोई फैसला ही नहीं हुआ। ऐसे में इस पर फिलहाल बहस करना ही बेकार है। पार्टी को यह भी लग रहा है कि इस टकराव की वजह से यह संदेश भी जा रहा है कि एनडीए में ही दरार बढ़ रही है। इसके अलावा बीजेपी में कुछ नेताओं का यह भी मानना है कि टकराव बढ़ने की एक वजह बीजेपी की तरह ही जेडीयू के भीतर की गुटबाजी भी है। ऐसे में चुप्पी साध ली जाए। इससे जेडीयू नेताओं को भी आखिरकार चुप होना पड़ेगा। अगर फिर भी जेडीयू की ओर से हमले होते हैं तो उस स्थिति में बीजेपी फिर अपनी रणनीति पर दोबारा सोच सकती है। जेडीयूसेकरेंगेबात बीजेपीअध्यक्षराजनाथसिंहनेभीइसीओरइशाराकरतेहुएकहाहैकिबीजेपीअपनेसहयोगीजेडीयूकेसाथमिलबैठकरबातचीतकरेंगे।उन्होंनेजेडीयूऔरबीजेपीकेबीचरिश्तेटूटनेकीसंभावनाकोभीखारिजकरदियाऔरकहाकिहमलोगबैठकरबातकरेंगे।