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वायु प्रदूषण को लेकर पिछले साल भी स्थिति बदतर ही रही थी। अक्टूबर में स्माग की चादर गत वर्ष भी छाई थी तथा इस बार भी ऐसे ही हालात हैं। सुबह के समय स्माग छा रही है तथा लोगों को आंखों में जलन व सांस लेने में परेशानी हो रही है। विशेष तौर पर दमा के रोगियों को यह दिक्कत ज्यादा हो रही है। यह हालात तब है जब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड का कार्यालय धारूहेड़ा में ही है। इसी माह पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण के चेयरमैन डा. भूरेलाल ने भी जिले का निरीक्षण किया था तथा भारी खामियां पाई गई थी। उन्होंने निरीक्षण के बाद प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की ओर से नगर परिषद रेवाड़ी व नगर पालिका बावल के अधिकारियों को प्रदूषण पर नकेल नहीं कस पाने को लेकर नोटिस भी जारी किया था लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हो रहा है। धारूहेड़ा व बावल दोनों ही औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण पर नकेल नहीं कस पाई है। इसके अतिरिक्त टूटी सड़कें व जाम भी प्रदूषण का कारण बन रहे हैं।