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समिति के जिलाध्यक्ष व धानक समाज के प्रधान भागीरथमल  खनगवाल,  सर्व समाज के महासचिव बिड़दी चंद गोठवाल,  अनुसूचित जाति महासभा के प्रधान लालाराम नाहर व भीम¨सह  दहिया  एडवोकेट ने संयुक्त बयान में बताया कि भारत सरकार द्वारा हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्तियां करने में हस्तक्षेप किया जाता है। इन हालातों में दलित वर्ग तो क्या अगर कोई सामान्य जाति का योग्य व्यक्ति भी जज बनना चाहे तो वह हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में जज नहीं बन पाता है, क्योंकि आजादी के बाद से अब तक राजनैतिक पहुंच वाले कुछ खास घरानों के लोग ही हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में जज बनते आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि अनुसूचित जाति-जनजाति ही नहीं, सामान्य परिवारों के योग्य व्यक्तियों के लिए भी ये दरवाजे बंद हैं। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा भेदभाव युक्त  यह नीति त्याग करके न्यायसंगत आधार पर आइएएस, आइपीएस  व आइएफएस  की तरह नियुक्ति होनी चाहिए।