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कुलपति प्रोफेसर डॉ. आरकेपी रमण की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में विवि और छात्र संघ के पदाधिकारियों सहित सभी छात्र संगठनों के अध्यक्ष/ सचिव व प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में विभिन्न छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों ने स्नातक प्रथम खंड में नामांकन सहित विश्वविद्यालय के अन्य कई गम्भीर समस्याओं से कुलपति को अवगत कराया। छात्र संगठनों ने कहा पूरी पारदर्शिता के साथ तत्काल ऑफलाइन नामांकन लिया जा सकता है, लेकिन इसमें पूरी तरह से पारदर्शिता अपनाई जाए। बैठक में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद्, ऑल इंडिया स्टूडेंट यूनियन, भारतीय विद्यार्थी मोर्चा, छात्र रालोसपा, छात्र राजद, जन अधिकार छात्र परिषद्, मधेपुरा यूथ एसोसिएशन, एनएसयूआइ, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के प्रतिनिधि शामिल थे। इस अवसर पर प्रति कुलपति डॉ. आभा सिंह, डीएसडब्ल्यू डॉ. अशोक कुमार यादव, कुलनाशसक डॉ. विश्वनाथ विवेका, परीक्षा नियंत्रक डॉ. नवीन कुमार, महाविद्यालय निरीक्षक कला एवं वाणिज्य डॉ. ललन प्रसाद अद्री, महाविद्यालय निरीक्षक विज्ञान डॉ. उदयकृष्ण, जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ. सुधांशु शेखर, कुलपति के निजी सहायक शंभू नारायण यादव, सीनेटर रंजन कुमार, ईशा असलम, माधव कुमार, रोशन कुमार बिट्टू, सारंग तनय, हर्षवर्धन सिंह राठौर, निशांत यादव, मो. वसीमुद्दीन, दिलीप कुमार दिल जापानी यादव, मुरारी कुमार, सौरभ कुमार, सारंग तनय, रंजन यादव,आमोद आनंद, अभिषेक यादव, दिलीप दिल, हर्षवर्धन सिंह राठौर, निशांत यादव, नीरज यादव, हिमांशु राज, प्रशांत यादव, छात्र राजद के ईशा असलम, माधव कुमार ,जापानी यादव, नवनीत कुमार, हंसराज मुन्ना, जाप के रोशन कुमार बिट्टू, रितेश, मुरारी, सौरभ कुमार, माया के सुधांशु यादव आदि उपस्थित थे। छात्रों को नहीं होगी किसी प्रकार की परेशानी: कुलपति कुलपति डॉ. आरकेपी रमण ने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के लिए ही है। वह हमेशा इस बात का प्रयास करेंगे कि विद्यार्थियों को कोई परेशानी नहीं हो। उन्होंने कहा स्नातक पार्ट वन (सत्र 2020-21) में नामांकन के लिए अब ऑफलाइन आवेदन लिया जाएगा। विधानसभा चुनाव को लेकर आदर्श आचार संहिता लागू हो जाने के कारण टेंडर की प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकी है। बैठक में कुलपति ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि बीएनएमयू में कोविड-19 और यूएमआइएस प्रकरण के कारण पहले ही नामांकन की प्रक्रिया शुरू होने में काफी विलंब हो गया है। उन्होंने बताया कि सबों के सहयोग से ही समस्या का समाधान होगा। यह प्रक्रिया सिर्फ एक वर्ष के लिए होगा। आगे यूएमआइएस का टेंडर हो जाने के बाद सभी कार्य ऑनलाइन माध्यम से ही होगा।