गयर और क्लच के बन कर

असल में, योगी सरकार ने वर्ष 2012 से लेकर 2017 तक की सहकारिता विभाग में हुई नियुक्तियों को सही नहीं माना। कई घोटाले भी सामने आए। इनकी जांच के लिए एसआइटी गठित की गई थी। सरकार ने उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम में बदलाव भी किया था। बदलाव के संबंध में तत्कालीन प्रमुख सचिव सहकारिता एमवीएस रामीरेड्डी ने 24 अप्रैल 2020 को शासनादेश जारी किया था। उसमें निर्देश था कि सहकारी संस्थागत सेवा मंडल सीधी भर्ती के लिए उत्तर प्रदेश राज्य सहकारी बैंक, जिला सहकारी बैंकों, सहकारी ग्रामीण विकास बैंकों और नगरीय सहकारी बैंकों से अधियाचन प्राप्त करेगा।