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रोजगार की प्राप्ति के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे बेरोजगार ईटीटी व टीईटी पास अध्यापकों ने महामारी के कारण बंद किए संघर्ष को दोबारा शुरू कर दिया है। इसके तहत पंजाब भर में विभिन्न स्थानों पर कांग्रेस सरकार के पुतले जलाए गए व गुप्त एक्शन संबंधी बैठक की गई। संगरूर के लालबत्ती चौक में बेरोजगार अध्यापकों ने पंजाब सरकार का पुतला फूंका, वहीं खनौरी के मेन रोड पर पुतला फूंक कर अध्यापकों ने रोष प्रदशर्न किया। यूनियन के प्रांतीय नेता मनी संगरूर ने कहा कि पंजाब सरकार घर-घर नौकरी का वादा कर सत्ता में आई थी, लेकिन सत्ता मिलते ही सरकार अपनी सभी वादों से साफ मुकर गई है। बेरोजगारों को नौकरी देने के बजाय घरों में शराब भेजने के फैसले किए जा रहे हैं। ऐसे में सरकार को नींद से जगाने के लिए आने वाले समय में तीखा संघर्ष शुरु किया जाएगा। राज्य प्रेस सचिव दीप बनारसी ने बताया कि पंजाब सरकार युवाओं को रोजगार देने प्रति गंभीर नहीं हैं, क्योंकि उच्च स्तरीय पढ़ाई कर डिग्रियां हासिल करने के बावजूद युवाओं को नौकरी नहीं मिल रही है। इसकी वजह से उनकी हालत दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है। उनके पास केवल संघर्ष का ही रास्ता बच जाता है। इसलिए अब आने वाले समय में बड़ी संख्या में बेरोजगार अध्यापक इक्ट्ठा होकर संघर्ष में कूदेंगे। उन्होंने मांग की कि ईटीटी अध्यापकों की 1664 पदों में बढ़ोतरी कर 12 हजार करने, महामारी की आड़ में अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया न रोकने, जरूरी सेवाओं के तहत आते सेहत व शिक्षा क्षेत्रों में निजीकरण पर रोक लगाने, सभी निजी अस्पतालों व स्कूलों को सरकार के दायरे में लाकर सेहत कर्मियों व अध्यापकों की भर्ती करने, बेरोजगार युवाओं को बेरोजगारी भत्ता देने, भर्ती दौरान दूसरा पेपर वाली शर्त रद करने, पहल के आधार पर पंजाब निवासियों को भर्ती करने, अन्य राज्यों से भर्ती होने वालों की हद तय करने की मांग की।