आज क समचर पत्र दैनक भस्कर

मुख्यालय को सुंदर बनाने का काम पूरा नहीं हो पाया है, जबकि हर सरकार में क्षेत्र से विधायक मंत्री रहे। स्थापना दिवस भी लोग भूलते रहे। यद्यपि पिछले तीन साल से कुछ मामलों में विकास हुआ है वह नाकाफी है। वहीं कई क्षेत्र विकास से अभी भी अछूता ही है। काफी पुराना है अनुमंडल का इतिहास गजट के मुताबिक 1863 ई. में उदाकिशुनगंज अनुमंडल बना। कभी भागलपुर जिले का हिस्सा होने वाले उदाकिशुनगंज अनुमंडल में अंग्रेजी हुकूमत के समय कोर्ट चला करता था। कहा जाता है कि एक बार भीषण बाढ़ की वजह से अनुमंडल उठकर सुपौल चला गया। जब नौ मई 1981 को मधेपुरा जिला बना तो 21 मई 1983 ई. को उदाकिशुनगंज अनुमंडल बना। 106 साल पुराना है थाना उदाकिशुनगंज का थाना 106 साल पुराना है। वर्ष 1914 में उदाकिशुनगंज में थाना स्थापित हुआ। उस वक्त अंग्रेजी हुकूमत थी। अंग्रेजी हुकूमत के समय का बना थाना भवन आज भी धरोहर के रूप में खड़ा है। नामकरण के पीछे का रहस्य उदाकिशनगंज नामकरण को लेकर तरह-तरह के किस्से बताए जा रहे हैं। यद्यपि कहा जाता है कि किशुनगंज में बाढ़ आने के बाद थाना उठकर उदा चला गया। जब बाढ़ खत्म हुई तो उदा के लोगों ने थाना वापस किशुनगंज आने देने का विरोध जताया। तब व्यवहारिक तौर पर तय हुआ कि किशुनगंज से पहले उदा का नाम जुड़ा रहेगा। उपेक्षित है धाíमक स्थल धाíमक रूप से भी क्षेत्र प्रचलित रहा है। उदाकिशुनगंज के नयानगर का भगवती मंदिर, आलमनगर का मां डाकनी स्थान, चौसा के बाबा बिशु राउत मंदिर, ग्वालपाडा के मझुआ गांव का 20वीं सदी के महान संत परम हंस मर्हिष मेंहीं दास महाराज की जन्म स्थली सदियों से उपेक्षित है। स्थलों पर रोज बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ लगती है। आस्थावस दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। स्थलों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की जरूरत है।