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पनीरी को सीधा बोने पर 3 से 4 दिनों तक चिड़िया आदि पक्षियों से बचाव करें जब तक कि बीज उग न जाएं। उन्होंने बताया कि पनीरी में खाद व उर्वरक का इस्तेमाल करने के लिए प्रति 100 वर्ग मीटर नर्सरी के लिए 2 से 3 किलोग्राम यूरिया, 3 किलोग्राम सुपर फास्फेट व 1 किलोग्राम पोटाश की जरूरत होती है। यदि पनीरी में पौधे पीले पड़ने लगें तो 1 किलोग्राम जिंक सल्फेट व आधा किलोग्राम चूने को 50 लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करें। उन्होंने किसानों को पनीरी की सिंचाई के प्रति भी ध्यान रखने की सलाह देते हुए बताया कि बोआई के समय खेत की सतह से पानी निकाल दें और बोआई के 3 से 4 दिनों तक केवल खेत की सतह को पानी से तर रखें। जब अंकुर 5 सेंटीमीटर के हो जाएं, तो खेत में 1 से 2 सेंटीमीटर पानी भर दें। जैसे-जैसे पौधे बढ़ते जाएं, पानी की मात्रा भी बढ़ाते जाएं। ध्यान रखें कि पानी 5 सेंटीमीटर से ज्यादा नहीं भरना चाहिए। क्योंकि अधिक पानी भर जाने से पौधे अधिक लंबे व कमजोर हो जाते हैं। ऐसे पौधे रोपाई के लिए अच्छे नहीं माने जाते हैं। उन्होंने सीमांत किसान भाईयों से अपील की अगर फिर भी उनको परेशानी आती है तो वो कृषि विभाग कार्यालय में आकर सुझाव व जानकारी ले सकते है।