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विशेषज्ञों की मानें, तो मोबाइल से निकलने वाली इलेक्ट्रो मैग्नेटिक तरंगें शरीर के ऊतकों पर असर डालती हैं। इससे बच्चे-बड़े दोनों ई-मेंशिया यानी इलेक्ट्रॉनिक मेंशिया के शिकार हो रहे हैं। उनमें भूलने की समस्या बढ़ रही है। कई लोगों को बाथरूम में रहते हुए मोबाइल रिंग होने का भ्रम होता है। नेटवर्क न मिलने पर बेचैनी महसूस होने लगती है। पहले रास्ते हमें याद रहते थे, पर अब बिना जीपीएस के रास्तों को याद रखना मुश्किल हो रहा है।