सस बहू क मंदर रजस्थन में कहं है

नगर पंचायत अकबरपुर के दीनदयाल नगर वार्ड बाढ़ापुर के जंगलेश्वर महादेव आश्रम के महंत दुर्गादत्त पांडेय ने शिव सहस्त्रनाम जप की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि सांसारिक जीवन से जुड़ी ऐसी कोई मुराद नहीं जो शिव सहस्त्रनाम जप से पूरी न हो, शास्त्रों में भगवान शंकर के नाम स्मरण को ही सारे सांसारिक सुखों को देने वाला कहा गया है। इस मंत्र जप से संपूर्ण जगत के स्वामी भगवान शिव सभी बुरे सपनों, अपशकुन, मन की बुरी भावनाएं, भूखमरी, भय, ¨चता और संताप, अशांति और ग्रह दोष तथा सारी बीमारियों से रक्षा करते हैं। शिवमंत्र में दिव्य शक्ति है, श्रद्धा भाव से मंत्र के जाप से मनोवांछित फल की प्राप्ति की जा सकती है। लेकिन मंत्र साधना के लिए ²ढ़ संकल्प का होना बेहद जरूरी है। उन्होने कहा कि शिव आदि और अंत के देवता है, आदि और अंत न होने से ¨लग को शिव का निराकार रूप माना जाता है। सिर्फ भगवान शिव ही ¨लग के रूप में पूजे जाते हैं। ¨लग रूप में समस्त ब्रह्मांड का पूजन हो जाता है क्योंकि वे ही समस्त जगत के मूल कारण माने गए हैं। शिव' का अर्थ है 'परम कल्याणकारी' और '¨लग' का अर्थ है 'सृजन'। वेदों में ¨लग शब्द सूक्ष्म शरीर के लिए आता है। यह सूक्ष्म शरीर मन, बुद्धि, पांच ज्ञानेन्द्रियां, पांच कर्मेन्द्रियां और पांच वायु यानी 17 तत्वों से बना होता है। वायु पुराण के अनुसार प्रलयकाल में समस्त सृष्टि जिसमें लीन हो जाती है और पुन: सृष्टिकाल में जिससे प्रकट होती है उसे सृजन अर्थात ¨लग कहते हैं। इस प्रकार विश्व की संपूर्ण ऊर्जा ही शिव¨लग की प्रतीक है।