southern railway loco pilot recruitment 2017

नगर के अजीत नगर, सदर बाजार, श्याम बिहारी गली में सैकड़ों की संख्या में बिहार, छत्तीसगढ़, पूर्वांचल के जिलों के परिवार रहते हैं। कई लोगों का सोने-चांदी की कारीगरी का काम है तो कुछ लोग नौकरी करने के लिए रहते हैं। ऐसे में वह पूरा पर्व यहीं पर मनाते हैं। ऐसे परिवारों में डाला छठ सबसे अहम पर्व होता है। अर्चना, गीता देवी, रंजना देवी, रचना देवी, अर्चना सोनी, स्वाती, सुनदंा, मीरा भवन में रानी सोनी, शिव कुमारी, गंगा देवी, गंगोत्री, प्रमिला बताती हैं कि वैसे तो यह महिलाओं का व्रत होता है, पर घर के पुरुष सदस्य इसमें प्रमुख सहयोगी के रूप में योगदान देते हैं। घर से डाला सजाकर सिर पर रखकर उसे मंदिर तक ले जाने, बाजार में खरीदारी करने व मंदिर में जरूरी व्यवस्थाएं वह देखने में मदद करके पुण्य के भागी बनते हैं। इस चार दिनी आस्था के लोक पर्व में सबसे पहले दिन बुधवार को छठी माता का दरबार सजाकर उनका पूजन किया गया। नहाय-खाय की परंपरा निभाते हुए लौकी की सब्जी, चने की दाल का सेवन किया। इसके बाद गुरुवार को खरना किया गया। इसमें व्रत रखने वाली महिलाओं में खास उत्साह देखा गया। अब यह परिवार रविवार को ही लहसुन व प्याज वाले भोजन का सेवन करेंगी। तब तक इससे परहेज रहेगा। माता का पूजन सात्विक ढंग से किया जाता है। इसी के चलते शाम को रसोई को साफ करके खरना करने को गेंहू के आटे की मोटी रोटी व लकड़ी के चूल्हे पर गुड़ की खीर बनाकर खाया।