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शिकायतकर्ता कृष्णा प्रसाद साह ने डीआइजी एनके सिंह को आवेदन देकर बताया था कि उनके घर के बगल में रहने वाले दोनों व्यापारी बीते 30 साल से नशीला गुड़ बेचते हैं। इस गुड़ का उपयोग देशी शराब बनाने में किया जाता है। रोज ट्रकों से गुड़ की टीन उतरते हैं। जमीन पर गिरने वाला गुड़ खाकर मवेशी बीमार पड़ने के बाद मर जाते हैं। गांव के लोग दारू बनाने के लिए गुड़ खरीदते हैं। रोक के बाद ही दोनों मिलीभगत से उत्तरप्रदेश के बरेली से गुड़ मंगवाते हैं। आवेदन के आधार पर एसडीपीओ ने छापेमारी की तो घर के बाहर दो ट्रक खड़े मिले। दोनों में गुड़ भरा हुआ था। व्यापारी अशोक गोयल ने एसडीपीओ को बताया कि यह गुड़ नशीला नहीं है और मवेशी को खिलाया जाता है। एसडीपीओ ने जांच के बाद दोनों ट्रक को जब्त कर पुलिस के हवाले कर दिया। वर्जन