सेक्स पर्न फल्म दखइए

विजयसार व दमाऊ की टंकार एवं रणसिंघा की गर्जना में डंगरियों में देव अवतरण होता है, जो अपनी अपनी शक्तियों का प्रदर्शन करते हैं। बैसी के जरिये देवडांगर अराध्य देवों के प्रति समर्पण, अध्यात्मक, सम्मान व सामाजिक एकता का संदेश भी देते हैं। इस कठिन तपस्यकाल में देवडांगरों के लिए दिन में तीन बार नहाना अनिवार्य होता है। इस अवधि में वह घर त्याग कर धूनी के पास आश्रम में संन्यासी जीवन बिताते हैं।