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जागरण संवाददाता, भागलपुर। सदर अस्पताल में नवजातों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जाता है, वो भी नर्सों के द्वारा। जानलेवा रोग से बचाने के लिए जो टीके 24 घंटे के अंदर दिए जाने चाहिए, उन्हें तीन दिन बाद भी नहीं दिया गया। ऐसे छह नवजात हैं, जिनके स्वजन उन्हें टीके दिलवाने के लिए आग्रह करते रहे, लेकिन आखिरकार नहीं दिए हैं। आश्चर्य तो यह है कि सदर अस्पताल हो या स्वास्थ्य केंद्र, वहां के प्रभारी भी आंख बंद किए हुए हैं। सिविल सर्जन की पहल करने के बाद भी व्यवस्था में सुधार होता नहीं दिख रहा है।