सभ प्रश्न हल करन अनवर्य है in english

जगाधरी के परवालो गांव में जनस्वास्थ्य और अभियांत्रिकी विभाग ने हाल ही में 24 एमएलडी की क्षमता वाला एसटीपी लगाया है। इस पर सरकार ने 71 करोड़ 65 लाख रुपये खर्च हुए हैं। इसी तरह यमुनानगर के बाडी माजरा में 20 एमएलडी का एसटीपी लगा है। दोनों एसटीपी का पानी ट्रीट होने के बाद पश्चिमी यमुना नहर में ही डाल दिया जाता है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी के आदेशानुसार किसी भी नहर में गंदे पानी के नाले और ट्रीट हुए एसटीपी का पानी नहीं डाला जा सकता, क्योंकि नहरों का पानी पीने में इस्तेमाल होता है। जबकि एसटीपी से ट्रीट होने के बाद भी पानी में बैक्टीरिया रह जाते हैं जो पीने के पानी में मिलकर स्वास्थ्य पर बुरा असर डालते हैं। इसलिए दोनों एसटीपी का पानी अब यमुना नदी में डाला जाएगा। मानसून के बाद सूखी ही रहती है यमुना नदी