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असिंचित क्षेत्रों में तो हालात और भी खराब हैं। काश्तकार बारिश के इंतजार में आकाश की ओर टकटकी लगाए हुए हैं। रोपाई को तैयार की गई धान नर्सरी या तो सूख गए हैं, या फिर किसान दूर दूर से बर्तनों में पानी ढ़ोकर पौधों को सींच रहे हैं। इतना ही नहीं असिंचित क्षेत्रों में खरीफ की सहायक फसलों के पौधे पानी के अभाव में मुर्झा गए हैं। काश्तकार गणेश सांणी, गोपाल सिंह राणा, गिरीश चंद्र, गोपाल सिंह मनराल व शंकर सिंह आदि का कहना है कि यदि कुछ दिनों में बारिश न होने पर सूखे की नौबत बन सकती है।