पुरने सक्के केंद्र क बक्र

पटना, अरुण अशेष। यह अच्छी बात है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इन दिनों खुद ही सुशासन की गुम हो चुकी कड़ियो की खोज में जुट गए हैं। जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम में उन्हें ऐसी कड़ियां खूब मिल रही हैं। उन्हें अहसास हो रहा है कि तंत्र सचमुच उस स्तर पर काम नहीं कर रहा है, जिसका दावा उन्हें रिपोर्ट करने वाले अधिकारी और साथ रहने वाले चुनिन्दा जन प्रतिनिधि करते हैं। दावा में यही बताया जाता रहा है कि सबकुछ ठीक ढर्रे पर है। लेकिन, मुख्यमंत्री खुद देख रहे हैं कि सच में उनके सपने के साथ क्या हो रहा है।  खैर, संतोष की बात यह है कि गड़बड़ियों को वह खुद देख रहे हैं। सकारात्मक परिणाम भी आने लगे हैं। जिला, अनुमंडल और प्रखंड कार्यालयों के अलावा पुलिस थाने में भी यह डर नजर आने लगा है कि शिकायत ऊपर तक जा सकती है।