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महंत कन्हैयानंद पुरी ने बताया कि सावन माह में यहां लोग भगवान शिव का जलाभिषेक करने श्रद्धालु कांवर लेकर आते हैं। इस पावन धाम को मिनी वैद्यनाथधाम भी कहा जाता है। मान्यता है कि यहां जलाभिषेक करने के बाद रात्रि विश्राम करने से यज्ञ करने का फल प्राप्त होता है एवं मनोकामनाएं पूर्ण होती है। दूध का अभिषेक करने से संतान की प्राप्ति होती है। इसलिए इन्हें बाबा दुधेश्वरनाथ कहा जाता है। पूरे सावन पटना गायघाट से जल लेकर 118 किलोमीटर की दूरी तय कर कांवरियां जलाभिषेक करने के लिए आते हैं। अरवल जिला के किजर के पुनपुन नदी से जल उठा कर कांवरियों जलाभिषेक करते हैं। सहशस्त्रधारा तालाब के जल का अभिषेक किया जाता है। सुरक्षा में लगी है सीसीटीवी