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जागरण संवाददाता, टांडा : नगर के मुहल्ला दुरिवाला में तीन साल बीतने के बाद भी सार्वजनिक शौचालय नहीं बन पाए हैं। इसके चलते मुहल्लेवासी खुले में शौच को विवश हैं। इनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।पालिका प्रशासन मोदी के स्वच्छता मिशन को लेकर गंभीर नहीं है। तभी तो तीन साल पहले बनने शुरु हुए सार्वजनिक शौचालय अभी तक अधूरे पड़े हैं। मुहल्ले में शौचालय न होने से यहां के निवासी खुले में शौच करने को मजबूर हैं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को स्वच्छ और सुंदर बनाना चाहते हैं। इसके लिए गांव से लेकर शहर तक सफाई पर खास ध्यान दिया जा रहा है। खुले में कोई शौच न करे। इसके लिए घर-घर शौचालय बनवाए जा रहे हैं। जहां पर घरों में सुविधा नहीं है। वहां सार्वजनिक शौचालय बनाए जा रहे हैं। जनपद भी खुले में शौच से मुक्त घोषित हो चुका है। बावजूद इसके कई लोग अभी भी खुले में शौच कर मोदी के स्वच्छता मिशन पर पानी फेर रहे हैं।नगर के मुहल्ला दुलीवाला में तीन वर्ष पूर्व डूडा द्वारा सार्वजनिक शौचालय बनाने का काम शुरु हुआ। शौचालय बनने से मुहल्ले वासियों में उम्मीद जागी थी अब उन्हें शौच के लिए जंगल की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। तीन साल बीतने के बाद भी यह शौचालय नहीं बन पाए हैं। इसके चलते मुहल्ले वासियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शौचालय न बनने से मुहल्लेवासी खुले में शौच करने को विवश हैं। खासकर महिलाओं को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इससे मुहल्ले वासियों में रोष है। इनकी सुध लेने वाला नहीं है।सभासद शिव प्रसाद सैनी का कहना है किशौचालय बनाने का कार्य विभाग की लापरवाही से लटका है। मुहल्ले के महेंद्रपाल सैनी, महेंद्र सैनी, हुकमी सैनी, प्रसादी राम सैनी, चुन्नी लाल, पातीराम, नन्हे, डाल चंद, नारायण दास आदि का कहना है शौचालय न होने से उन्हें और परिवार की महिलाओं को खुले में शौच को जाना पड़ता है।साथ ही कहा कि यदि शौचालयों का निर्माण शीघ्र नहीं किया गया तो धरना प्रदर्शन किया जाएगा।साथ ही शिकायत मुख्यमंत्री से करने की चेतावनी दी है।पालिका अध्यक्ष महनाज जहां का कहना हैकि सीएनडीएस के माध्यम से शौचालयों का निर्माण कराया गया है। कई बार पालिका द्वारा विभाग से पत्राचार किया गया है, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया गया।