मेरे फन क बैटर जल्द खत्म ह जत है

विद्यालय में पढे़ उपेन्द्र कुमार दास दिल्ली में सीनियर इनकम टैक्स आफिसर के पद पर कार्यरत हैं। वहीं अमरेन्द्र कुमार दास के दो पुत्र एक पुत्र अंशू दिल्ली में सहायक आयुक्त पुलिस के पद पर और दूसरा पुत्र बिट्टू अमेरिका में, डा. पवन कुमार लाल दास वेस्टइंडीज के डोमनिका में ऑलसेंट मेडिकल विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के पद पर, अरूण कुमार दास अमेरिका में इंजीनियर के पद पर, रमण कुमार झा मुंबई में एसबीआइ (मुख्यालय) डीजीएम के पद पर कार्यरत हैं। अभिताभ लाल दास आइएएस है। इसके अलावा विद्यालय से निकले दर्जनों ऐसे छात्र हैं, जो वर्तमान में सरकारी और गैर सरकारी कार्यालयों में ऊंचे पदों पर कार्यरत हैं। विद्यालय के ऐतिहासिक भवन के कई कमरे सालों से जर्जर : विद्यालय के पुराने भवन के एक को छोड़कर अन्य 13 कमरे पिछले कई सालों से जर्जर हैं। विद्यालय के पश्चिम और दक्षिण दिशा से चहारदीवारी का अभाव हैं। वहीं चापाकलों की भी कमी है। पुराने भवन का कमरा जर्जर रहने के कारण वर्तमान में 2009-10 में प्लस टू के लिए बने भवन के तीन और पुराने भवन के एक कमरा में विद्यालय के छात्रों का वर्ग संचालन किया जाता है। विद्यालय प्रशासन द्वारा वरीय अधिकारियों एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों को लगातार आग्रह किए जाने के बाद भी जर्जर पुराना भवन का निर्माण नहीं कराया जा सका है। प्रधानाध्यापक इफ्तेखार अकबर ने बताया कि विद्यालय की उपरोक्त समस्याओं से विभाग के अधिकारियों को अवगत कराया गया है । बताया कि पिछले दो सालों में विद्यालय का परीक्षा परिणाम काफी अच्छा रहा है । लैब एवं अन्य संसाधनों की स्थिति ठीक है। विद्यालय का प्रशासनिक भवन जर्जर : तीन प्रयोगशाला, एक पुस्तकालय एवं एक हाल करीब 850 छात्रों वाले इस विद्यालय को प्लस टू का दर्जा दिए जाने के बाद भी गौरवशाली इस विद्यालय पर आज संकट मंडरा रहा है। वर्तमान में इस विद्यालय में प्रधानाध्यापक सहित 24 शिक्षक-शिक्षिकाएं कार्यरत है। पिछले एक दशक से विद्यालय के मैदान का भी सौन्दर्यीकरण नहीं होने से बरसात के दिनों में मैदान में जलजमाव रहता है। विद्यालय का इतिहास गौरवशाली रहा है। इस विद्यालय से पढ़कर वर्तमान में सीनियर इनकम टैक्स आफिसर के पद पर कार्यरत हूं और देश की सेवा कर रहा। इस विद्यालय के फिर से कायाकल्प के लिए विभाग और जनप्रतिनिधियों को गंभीरतापूर्वक पहल करना चाहिए। विद्यालय के सौंदर्यीकरण के दिशा में ठोस योजना बनाने की जरूरत है। साथ ही छात्रावास को पुन: चालू कराने की भी आवश्यकता है।