मद यजन लस्ट

शहर में टेंपो वालों की दबंगई चलती है। क्षमता से अधिक सवारी बैठाना तो उनकी आदत बन गई है। यहां तक कि चालक अपने अगल-बगल भी तीन यात्री बैठा लेते हैं। इससे टेंपो चलाने में उन्हें परेशानी भी होती है, लेकिन किराए के लालच में ऐसा करने से बाज नहीं आते। यात्री बैठाने और उतारने के लिए वे बीच रास्ते या चौराहे पर टेंपो खड़ा कर देते हैं। इससे भले ही हादसा हो जाए या जाम लग जाए, उन्हें परवाह नहीं। उनकी मनमानी का नजारा हर रूट पर दिखता है, लेकिन रोकेगा कौन? जिन पुलिस वालों की यह जिम्मेदारी है, वे देखने के बाद आंख मूंदे रहते हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि वे वसूली करते हैं। अधिकारी भी उनकी मनमानी पर ध्यान नहीं दे रहे। ओवरटेक करने पर सुरक्षाकर्मियों की खैर नहीं। ये सीधे पुलिस से भिड़ जाते। इन्?हें कोई डर नहीं। अधिकतर चौराहे पर अनट्रेंड होमगार्ड के जवानों को ड्यूटी दी गई है। अधिकारी यह नहीं बता पाते कि क्यों ट्रैफिक कंट्रोल नहीं हो पाता? अब तक के प्रस्ताव