कमधेनु सत्त रजल्ट

कानपुर, जेएनएन। सतत विकास, तेजी से पैर परासता शहर, सड़कों पर बढ़ता वाहनों का बोझ पर्यावरण संरक्षण और उसकी स्थिरता पर हमला कर रहा है। इसी का नतीजा है कि जंगल, हरियाली और पेड़ पौधों की संख्या दिन ब दिन कम होती जा रही है। जंगली जानवर गिनती के रह गए हैं। पेड़ पौधे और पक्षियों की कई प्रजातियों पर संकट के बादल छाए हैं। इन समस्याओं का हल निकालकर उसका ठोस एक्शन प्लान तैयार करने की योजना है, जिसके लिए चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्याेगिकी विश्वविद्यालय ने पहल की है।