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पूनम की तमाम कहानियां भी प्रकाशित हो चुकी हैं। लघु संस्मरण भी आ चुके हैं। निवेदिका उनका पहला उपन्यास है। दो और उपन्यास वह लिख रही हैं। ब्रज भाषा को वह अपनी कलम के माध्यम से सशक्त बना रही हैं। गजल, गीत, दोहे, छंद, पद, मल्हार, गारी आदि  विद्या पर वह लिख चुकी हैं। उन्होंने बताया कि गांव में आज भी शादी-ब्याह में गारी खूब चलती है। रामचरित मानस का जिक्र किया। कहा, दशरथजी जब बरात लेकर जनकपुरी पहुंचे थे तो जनकपुरी की महिलाओं ने गारी गीत सुनाया था, तभी से हमारे यहां गारी विधा प्रचलित है। शादी-ब्याह में आज भी महिलाएं इस परंपरा का निर्वहन करती हैं।