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प्रशासन की सख्ती के वावजूद आदर्श आचार संहिता की धज्जियां उड़ रही हैं। चुनाव प्रचार में दर्जनों वाहनों का काफिला प्रत्याशियों के दमखम का परिचायक बना है। जिनके साथ जितनी गाडिय़ों का काफिला उनको उतना ही मजबूत व जीत का प्रबल दावेदार समझा जा रहा है। बाइक जुलूस में बाइक देने के लिए वोटरों को लोगो को प्रति पांच सौ- हजार रुपये भी मिल जा रहे हैं। चार पहिया वाहन है तो हजार रुपये से तीन हजार तक आमदनी हो रही। कई प्रत्याशी अपने कार्यकर्ता को ब्रांडडेड कपड़े व जूते-मोबाइल भी बांट रहे हैं। वोटर भी सबको खुश करने में लगा है। बहती गंगा में हाथ धोने का मौका वह भी नहीं चूकना चाहते। वोटरों की हामी से प्रत्याशी मन ही मन जीत को लेकर आश्वस्त है। मतदान से ज्यादा भरोसा उम्मीदवार को धनबल पर है। पब्लिक भी वैसे कंडीडेट से भलीभांति परिचित है और उनसे खूब इंज्वाय कर रही है। लोगों का कहना है कि प्रत्यशियों में रुपये बांटने का प्रचलन हो गया है। जिस कारण सभी योजनाओं में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों द्वारा धड़ल्ले से कमीशन लिए जाते हैं।