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बेसहारा मवेशी से होने वाली परेशानी को लेकर आए दिन लोग अधिकारियों से शिकायतें करते हैं। नगरपालिका ने तीन साल पहले धरपकड़ अभियान शुरू किया था। पहले पालिका के सफाई कर्मियों से मवेशी पकड़वाए गए, इसके बाद 325 रुपये प्रति मवेशी के हिसाब से मोहित सक्सेना को ठेका दे दिया गया। दो साल पहले राजकीय गोसदन कटरी धर्मपुर से एक संगठन के कार्यकर्ताओं ने मवेशियों की दुर्दशा होने का आरोप लगाकर उन्हें भगा दिया था। पालिका ने करीब 600 मवेशी भागने का दावा किया था। कुछ मवेशी बाढ़ का पानी भरने से भाग गए। गत वर्ष कानपुर की समाजोत्थान सेवा संस्था को 495 रुपये प्रति मवेशी पकड़ने की दर से एक हजार मवेशी पकड़ने का ठेका दिया गया। उनका टेंडर समाप्त होने के बाद सितंबर में नगरपालिका ने श्रमिकों को भुगतान कर अभियान शुरू कराया। जिसमें 299 मवेशी पकड़े जा चुके हैं। अभियान पर पालिका 10 लाख से अधिक रुपये खर्च कर चुकी है, फिर भी हर गली-मोहल्ले व मुख्य बाजार में मवेशियों के झुंड लगे रहते हैं। आए दिन लोग इनकी चपेट में आकर घायल हो जाते हैं। अधिशासी अधिकारी रविद्र कुमार ने बताया कि शहर में आसपास के गांव से छोड़े जाने वाले मवेशी आ जाते हैं। प्रतिदिन रात में अभियान चलता है। वह स्वयं अभियान की समीक्षा करते हैं। औसतन 10 मवेशी प्रतिदिन पकड़े जा रहे हैं। लोगों से मवेशी न छोड़ने के लिए अनुरोध भी किया जा रहा है। अभी तक मवेशी पालकों से करीब 1.98 लाख की वसूली भी हो चुकी है।