hr recruiter freshers jobs in bangalore

सिविल सर्जन डा. संतलाल वर्मा ने इस संबंध में चिकित्सकों को निर्देश भी जारी कर दिए हैं। उन्होंने बताया कि मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया ने वर्ष 2009 में यह गाइडलाइन जारी की थी। सभी सरकारी-प्राइवेट चिकित्सकों को ओपीडी स्लिप पर कैपिटल अक्षरों में दवा का नाम साल्ट सहित लिखना था। इसका उद्देश्य ब्रांडेड नेम की दवा को जबरन थोपने पर अंकुश लगना था। प्राइवेट डाक्टर तो पहले दिन से ही गाइडलाइन की अवेहलना करते रहे हैं। सरकारी चिकित्सक भी जल्दबाजी में कैपिटल या पढ़ने योग्य अक्षरों में दवा का जेनेरिक नाम, साल्ट सहित नहीं लिखते।