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शहर के हर्ट में स्थित केंद्रीय पुस्तकालय के अस्तित्व पर खतरा है। भवन अत्यंत जर्जर हो गया है। बारिश होने पर छत से पानी टपकता है। पुस्तकालय का इतिहास इतराने वाला है परंतु वर्तमान अंधकारमय है। पुस्तकालय का निर्माण अंग्रेजों के जमाने में वर्ष 1918 में किया गया था। जिस समय पुस्तकालय का निर्माण हुआ था उस समय किसी ने यह सोचा भी नहीं होगा यह स्थिति होगी। पुस्तकालय में पुस्तकों की संख्या 17 हजार 500 है। कई दुर्लभ पुस्तकें यहां हैं। छत से पानी टपकने के कारण किताबें खराब हो रही है। भवन जर्जर रहने के कारण पाठक भी जाने से कतराते हैं। पुस्तकालय में उपन्यास, कहानी, साहित्य, काव्य, संस्कृत, उर्दू, बंगला की किताबें हैं। ग्रंथपाल मिथिलेश कुमार ने बताया कि वर्ष 1998 से डीएम एवं जिला शिक्षा पदाधिकारी को भवन निर्माण के लिए पत्र भेज रहा हूं। भवन प्रमंडल विभाग के द्वारा 47 लाख 76 हजार का प्राक्कलन बनाया गया परंतु अब तक निविदा नहीं निकाली गई। प्राक्कलन फाइलों में कैद होकर रह गया है। बता दें कि पाठक एवं पुस्तकों के बीच की दूरी बढ़ती जा रही है। पुस्तक का उपयोग मनुष्य के जीवन में बचपन से आरंभ होता है।