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जनपद में लगभग एक हजार लोग बैंड का व्यवसाय कर रहे हैं। एक बैंड संचालक के यहां 15 से 20 कर्मचारियों को रोजगार मिलता है। इसके अलावा रोडलाइट में भी आठ से 10 श्रमिक लगते हैं। इस तरह बैंड व्यवसाय से 30 हजार से अधिक लोगों के परिवारों का भरणपोषण होता है। बैंड संचालक संजू ने बताया कि लॉकडाउन से व्यवसाय पूरी तरह से ठप हो गया। बैंड में काम करने वाले कर्मचारियों को 80 फीसद मजदूरी एडवांस देनी पड़ती है। एक कर्मचारी पर कम से कम 60 हजार रुपये खर्च होते हैं। मार्च में सहालग के चलते कर्मचारियों को एडवांस दे दिया गया था। लॉकडाउन लगने से बुकिग कैंसिल हो गईं। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों को एडवांस देते समय यह शर्त रखी जाती है कि उनकी बुकिग होने पर वह अपने हिस्से का काम करेंगे। बुकिग कैंसिल होने या बैंड न बजने पर कर्मचारी लिया हुआ पैसा वापस नहीं देंगे और न ही अगली सहालग में पैसा काटा जाएगा। नवंबर में सहालग होने से नुकसान की भरपाई होने की उम्मीद है। कोविड नियमों के पालन के लिए इंतजाम किए जा रहे हैं।