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सिद्धार्थनगर : परसा गांव वासी एक पखवारे भीतर हुई आठ मौतों से सहमे हुए हैं। कोरोना से बचाव के लिए टीकाकरण तो हो रहा, लेकिन मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की कोई टीम मौके पर नहीं पहुंची। लापरवाही का आलम यह है कि ग्रामीण खुद को असुरक्षित मान रहे हैं। यह गांव की जनसंख्या लगभग 1200 है। पंचायत चुनाव के परिणाम आने के बाद से मौतों का सिलसिला जो शुरू वह हर दूसरे या तीसरे दिन किसी न किसी की मौत से जारी है। जिससे अब तक कुल आठ लोगों की मृत्यु हो चुकी है। गुलाम यासीन को सर्दी खांसी, बुखार हुआ। सांस लेने की दिक्कत हुई। जब स्वजन निजी चिकित्सक के यहां ले गए तब देर हो गई। और उनकी मृत्यु हो गई। अब्दुल्लाह कई रोगों से पहले ही ग्रसित थे। बुखार, खांसी की दिक्कत हुई। उनकी लीला समाप्त हो गई। हबीबुल्लाह को सांस की दिक्कत, बुखार आदि की समस्या हुई। वह पूर्व में शुगर से ग्रस्त थे। उनमें कोरोना के लक्षण भी थे, उनकी मौत हो गई। राम शंकर मुंबई से घर आये उसी दिन मौत हो गई। इसी तरह मोहम्मद की भी आनन फानन में मौत हो गई। तीन वर्षों से इलाज करा रही अर्बुननिशा भी चल बसी। गुरुवार को बुजुर्ग रोशन की भी मौत हो गई। पखवारे भीतर आठ मौतों से लोग सहमे हैं। हालांकि जिनमें कोविड 19 के लक्षण थे उनके स्वजन ने लापरवाही बरतते हुए जांच भी नहीं कराई। स्वास्थ्य विभाग कुंभकर्णी नींद सो रहा है। टीकाकरण तो करा रहा है, परन्तु न तो अब तक ग्रामीणों की जांच हुई न ही दवा वितरित की गई। प्रधान ने जरूर गांव का सैनिटाइजर करा दिया है। सीएमओ डा. संदीप चौधरी ने कहा कि गांव में आठ मौत की जानकारी नहीं है। यदि ऐसा है तो जल्द ही गांव में टीम भेजी जाएगी। सभी संदिग्ध रोगियों की जांच भी होगी। लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।