एयरटेल क डट कैसे देख जत है

हिंदी साहित्य के पिछले तीन चार दशक के परिदृश्य पर नजर डालें तो पाते हैं कि इस कालखंड में कई अफसर लेखक-कवि हुए। अगर वो अपने समकालीन रचनाकारों को लाभ पहुंचाने की स्थिति में होते हैं तो वो चर्चित भी होते रहे हैं। वजह बताने की जरूरत नहीं। कोई अफसर किसी शोध संस्थान में पदस्थापित होते ही पुस्तक लिखने लग जाता है। उनके पास सहूलियतें होती हैं और समकालीन लेखकों को उपकृत करने का संसाधन। इन सरकारी सहूलियतों और संसाधनों के बल पर ज्यादातर अफसर कवि हो जाते हैं। नामवर सिंह ने कई ऐसे अफसरों को सदी का श्रेष्ठ रचनाकार तक घोषित किया था।