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मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ पी.एस. सिसोदिया ने बताया है कि लू के प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार के साथ मुंह का सूखना तथा सिर में तेज दर्द होना, अधिक प्यास लगना, पेशाब कम होना व जलन होना, पसीना नहीं आना व भूख कम लगना, चक्कर आना तथा कभी-कभी बेहोश हो जाने जैसे लक्षण भी हो सकते हैं. इस तरह के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल ही उपचार कराना चाहिए. तेज गर्मी के कारण लू लगने के अलावा मांसपेशियों में दर्द, थकावट तथा बेहोशी भी हो सकती है, जिसमें बुखार नहीं होता. लू से प्रभावित होने वालों का तत्काल उपचार कराना चाहिए. लू के प्रारंभिक उपचार के तहत मरीज को छायादार एवं हवादार स्थान पर रहना चाहिए. मरीज को ठंडे पानी या बर्फ से तब तक गीला करते रहना चाहिए जब तक तापमान कम न हो जाए. मरीज को सामान्य होते तक आराम करना चाहिए। अधिक पानी या अन्य उपलब्ध पेय पदार्थ जैसे कच्चे आम का पना, जल-जीरा, मट्ठा, शर्बत, नींबू पानी आदि पिलाते रहना चाहिए. ओ.आर.एस. का घोल या स्वयं बनाया गया जीवन रक्षक घोल (एक ग्लास पानी में एक चम्मच शक्कर व एक चुटकी नमक) देना अधिक उपयोगी होता है. गांवों में मितानिन डिपो होल्डर के पास प्राथमिक उपचार की दवाइयां उपलब्ध कराई गई है उसे प्राप्त कर आपात स्थिति से बचा जा सकता है. प्रारंभिक उपचार के बाद नजदीक के अस्पताल के पास ले जाकर भर्ती कर उपचार कराना चाहिए.