चूरमे के लड्डू बनने क वध

मंजू जैन ने बताया कि दस वर्ष पहले गलियों में पानी की आपूर्ति होती थी। अब तो मौसम चाहे कोई हो, पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। शिवप्रसाद ने बताया कि कुछ समय चलने के बाद सबमर्सिबल भी पानी कम देने लगते हैं। कभी-कभी बंद भी हो जाती है। कुछ लोग दिन में तो कुछ रात में नंबर से पानी भरते हैं। कई बार अधिकारियों को बताया, लेकिन उनके कान पर जूं तक नहीं रेंगी।