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ऐसे में जैनब पत्र लिखवाती है। इस दौरान स्पेलिंग मिस्टेक होती है। पूरे नाटक में इन परिस्थितियों से विनोद की स्थितियां उत्पन्न होती हैं। बदली परिस्थितियों में गांधी जी को वापस आने और फिर देश में सभी समुदायों में एकता स्थापित करने की गुजारिश करते हैं। अंत में जैनब नातिन को बताती है कि वह भी अपने वालिद के साथ वतन हिंदुस्तान को छोड़कर पाकिस्तान आ गये।