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जनपद पिथौरागढ़ की सीमा से लगे सरयू नदी के किनारे बसा चिमाखोली गांव आजादी के 70 साल बाद भी सड़क सरीखी बुनियादी सुविधा से महरूम है। आजाद ¨हद फौज में भर्ती होकर देश की आजादी के लिए बलिदान देने वाले स्व. हरीदत्त पाण्डे के परिजन अभी भी पांच किमी की कठिन चढ़ाई हांफते-हांफते तय करने को अभिशप्त हैं। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष व क्षेत्रीय विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल के प्रयासों से मयोली-चिमाखोली मोटर मार्ग स्वीकृत हुआ था। इस क्षेत्र में बहुतायत से पाया जाने वाला चीड़ और साल घना जंगल अवरोधक बन गया है जिसके चलते वन विभाग से अभी तक क्लीयरेंस नहीं मिल पाई है। बुनियादी समस्याओं से जकड़े इस गांव के वाशिंदे सड़क मार्ग के अभाव में यहां से धीरे धीरे पलायन करने लगे हैं। वर्तमान हालत यह है कि आधा गांव खाली हो चुका है। स्व. हरीदत्त पाण्डे का पूरा परिवार अभी भी इसी गांव में निवास कर रहा है। गांव की इस तरह की जा रही अनदेखी से पूरा परिवार स्तब्ध और आक्रोशित है।