बलसपुर चरमर ट्रेन रनंग स्टेटस

प्राणवायु का यह मुख्य स्त्रोत है। बरगद का फल, बीज, दूध, जटाएं विभिन्न बीमारियों में उपयोगी हैं। 10 जून को वट सावित्री व्रत है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु के लिए वट सावित्री व्रत रखती हैं। इस बार महिलाएं पूजन के साथ बरगद के पौधों को रोपित करने का संकल्प भी लेते दिख रही हैं। महिलाओं का कहना है कि वृक्ष हमारे जीवन की धरोहर है। वृक्षों के बिना जीवन की कल्पना भी कर पाना संभव नहीं है। चाहे वह मनुष्य हो या जीव-जंतु सभी के लिए प्रकृति ने वृक्ष एक ऐसे अमूल्य रतन के रूप में दिया है जो प्राणवायु से सभी के जीवन की रक्षा कर रहे हैं। कोरोना संकटकाल में प्राणवायु को लेकर लोग बेहद परेशान रहे। लोगों को बरगद, पीपल, नीम जैसे कई वृक्षों की याद आने लगी। ये सभी वृक्ष ऑक्सीजन का मुख्य स्त्रोत है। नगर के ज्योतिषाचार्य पंडित विपिन कुमार पांडेय बताते हैं कि धर्म शास्त्रों में कई पेड़ पौधों को पूजनीय माना गया है। भारत में सबसे अधिक जिन वृक्षों को पूजनीय माना गया है उनमें बरगद का वृक्ष प्रमुख है। यक्षों के राजा मणिभद्र से वट वृक्ष उत्पन्न हुआ था। यह वृक्ष त्रिमूर्ति का प्रतीक है। इसकी छाल में विष्णु जी जड़ में ब्रह्मा और शाखाओं में भगवान शिव का वास माना जाता है। इस वृक्ष को भगवान शिव का प्रतिरूप भी माना जाता है। वृक्ष में त्रिमूर्ति देवताओं का वास होने के कारण इसे जीवनदायिनी वृक्ष के रूप में भी जाना जाता है। छाल, दूध पत्ते, जड़, फल सभी औषधीय रूप में उपयोगी एवं मानव जाति के लिए काफी लाभकारी है। प्राणवायु का यह वृक्ष प्रमुख स्त्रोत है। पशु पक्षियों के निवास का एक बहुत बड़ा स्त्रोत है जिस पर रहकर पशु पक्षी अपने आप को सुरक्षित महसूस करते हैं। महिलाएं वट सावित्री की पूजा के दौरान बरगद के पेड़ की पूजा कर धागा बांधती हैं। वृक्ष की परिक्रमा कर पति की दीर्घायु व सुख समृद्धि की कामना करते हैं। 10 जून को वट सावित्री की पूजा है। जिसकी तैयारियों में सुहागन महिलाएं जुटी हुई हैं। साथ ही यह संकल्प ले रही हैं कि कोरोना संकटकाल में इस पूजा के दिन एक बरगद का पौधा अवश्य रोपित करेंगे। प्राणवायु का मुख्य स्त्रोत है बरगद का वृक्ष